‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की तरफ मोदी सरकार ने एक और कदम बढ़ा दिया है। आज पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में लॉ मिनिस्ट्री ने एक समिति का गठन किया है जिसमें कुल 8 लोग शामिल होंगे। इस समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, गुलाम नबी आज़ाद, एनके सिंह, सुभाष कश्यप, हरीश साल्वे और संजय कोठारी शामिल हैं। नितेन चंद्र इसमें सचिव की भूमिका में होंगे। इसके अलावा समिति की बैठक में न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान पीएम ने कहा था ‘सीधे कह देना कि हम इसके पक्षधर नहीं हैं। आप इस पर चर्चा तो करिए भाई, आपके विचार होंगे। हम चीजों को स्थगित क्यों करते हैं। मैं मानता हूं जितने भी बड़े-बड़े नेता हैं, उन्होंने कहा है कि यार इस बीमारी से मुक्त होना चाहिए। पांच साल में एक बार चुनाव हों, महीना-दो महीना चुनाव का उत्सव चले। उसके बाद फिर काम में लग जाएं। ये बात सबने बताई है। सार्वजनिक रूप से स्टैंड लेने में दिक्कत होती होगी।’
सीधे-सीधे शब्दों में कहें तो पीएम मोदी का ‘एक देश-एक चुनाव’ करवाने के पीछे तर्क यह है कि इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि देश का संसाधन भी बचेगा। देश के जवान को आधे से ज्यादा समय चुनाव करवाने में लगे रहते हैं, जिस कारण एक जगह से दूसरे जगह जाते रहते हैं, इसमें जो बड़ी राशि खर्च होती है। उस पर भी लगाम लगेगा।
ऐसे में बीजेपी का तर्क है कि यदि इन चुनावों को एक साथ करवाया जाता है तो पैसे और समय की बचत होगी, जिसे देश के विकास में लगाया जा सकेगा। पीएम मोदी लंबे समय से एक साथ चुनाव करवाने के पक्षधर रहे हैं। कुछ साल पहले उन्होंने इसको लेकर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी। लेकिन राय अलग होने के कारण इस बैठक से कोई निष्कर्ष नहीं निकला था।