कच्चातिवु पर बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि 1974 में, भारत और श्रीलंका ने एक समझौता किया जहां उन्होंने एक समुद्री सीमा खींची, और समुद्री सीमा खींचने में कछतीवू को सीमा के श्रीलंका की ओर रखा गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उसे जाने दिया।कच्चातिवु द्वीप के मुद्दे पर केंद्र सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बाद आज विदेश मंत्री जयशंकर ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे को उठाया। जयशंकर ने कहा कि 1974 में, भारत और श्रीलंका ने एक समझौता किया जहां उन्होंने एक समुद्री सीमा खींची, और समुद्री सीमा खींचने में कछतीवू को सीमा के श्रीलंका की ओर रखा गया था। जयशंकर यहीं नहीं रुके। उन्होंने तमिलनाडु सरकार डीएमके पर भी हमला बोला। विदेश मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और DMK ने इस मामले को इस तरह से लिया है मानो इस पर उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है।विदेश मंत्री एस जयशंकर के पहले खुद पीएम मोदी भी कच्चातिवु पर निशाना साध चुके हैं। जयशंकर की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यत: कांग्रेस निशाने पर रही। जयशंकर ने 1974 में हुए उस समझौते की बात दोहराते हुए कहा कि उस साल भारत और श्रीलंका के बीच एक समझौता हुआ था। दोनों देशों ने उसपर हस्ताक्षर किए थे। उसके बाद कांग्रेस की तब की सरकार ने एक समुद्री सीमा खींची और समुद्री सीमा खींचने में कच्चातिवु को सीमा के श्रीलंकाई पक्ष पर रखा गया। जयशंकर ने आगे कहा कि हम जानते हैं कि यह किसने किया, यह नहीं पता कि इसे किसने छुपाया। हमारा मानना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि यह स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।