चुनाव आयोग ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रत्येक बूथ पर मतदान का प्रमाणित आंकड़ा जारी करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।

चुनाव आयोग ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रत्येक बूथ पर मतदान का प्रमाणित आंकड़ा जारी करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।

आम चुनाव में मतदान के अंतिम आंकड़ों को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रत्येक बूथ पर मतदान का प्रमाणित आंकड़ा जारी करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। आयोग के हलफनामे में कहा गया कि फॉर्म 17सी के आधार पर मतदाताओं के बूथवार आंकड़े सार्वजनिक करने से संशय के हालत पैदा होंगे क्योंकि, बाद में इसमें पोस्टल बैलेट के वोट शामिल किए जाएंगे। यह कन्फ्यूजन तब और बढ़ जाएगा जब मुकाबला नजदीकी हो।आयोग ने बताया कि बूथवार आंकड़े जारी करने के बाद लोगों को यह समझाना मुश्किल हो जाएगा कि मतदाताओं की अंतिम संख्या में बदलाव क्यों हो गया। इस स्थिति का फायदा निहित स्वार्थी लोग उठा सकते हैं जो पूरी चुनाव प्रक्रिया पर असर डालने वाले होंगे। आयोग एडीआर की याचिका का विरोध कर रहा है जिसमें उसने 48 घंटे के भीतर मतदान के बूथवार आंकड़े जारी करने की मांग की है। आयोग ने एडीआर पर भी निहित हितों के कारण आयोग के कामकाज पर शक पैदा करने का आरोप लगाया।नई दिल्ली। आम चुनाव में पांचवें चरण का मतदान समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग ने देश के दो प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस को जाति, समुदाय, भाषा और धार्मिक आधार पर प्रचार करने से बचने की सलाह दी है। आयोग ने दोनों दलों से कहा कि वे अपने स्टार प्रचारकों को अपने भाषण सुधारने, सावधानी बरतने और मर्यादा बनाए रखने के लिए औपचारिक नोट जारी करे। आयोग ने कहा कि ‘चुनाव आते जाते रहते हैं पर राजनीतिक दल बने रहेंगे। भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक तानेबाने की रक्षा करना सबसे बढ़ कर है।

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