सोमवार को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हिंदी भाषा की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह माँ के चरणों में चारधाम होते हैं, उसी तरह मातृभाषा की गोद में आनंदधाम है। उन्होंने बताया कि हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, जो हमारी संस्कृति को जोड़ने का काम करती है।
इस कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री ने हिंदी साहित्य और उसके प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले भारत और विदेशों के 10 प्रमुख साहित्यकारों को राष्ट्रीय हिंदी भाषा सम्मान से सम्मानित किया। साथ ही, उन्होंने कई नई साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी की वर्णमाला ही हमारी पहली पाठशाला है, जो अनपढ़ को ज्ञानी बनाती है। उन्होंने प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिंदी के प्रति समर्पण की सराहना की। इस मौके पर ‘अभियंता दिवस’ की भी बधाई दी गई।
कार्यक्रम में ‘विक्रमोत्सव 2025’ को एशिया के ‘वॉव अवार्ड’ में गोल्ड अवार्ड से नवाजा गया। इसके अलावा, ‘Be इंडियन, Buy इंडियन, हमारी-लक्ष्मी-हमारे पास’ अभियान और विश्व हिंदी ओलंपियाड के पोस्टर का भी लोकार्पण हुआ। संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।