मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई में “इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज इन पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग एंड वाइट गुड्स इन मध्यप्रदेश” को संबोधित किया। इस सत्र में उन्हें रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में ₹19,900 करोड़ और अन्य सभी सेक्टर्स में ₹54,400 करोड़ से अधिक, यानी कुल ₹74,300 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 7000 रोजगार सृजित होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराष्ट्र के उद्यमियों से मध्य प्रदेश में निवेश करने का आग्रह करते हुए दोनों राज्यों को “प्रगति के क्षेत्र में जोड़ीदार राज्य” बताया। उन्होंने शिवाजी महाराज, सिंधिया, होल्कर, पवार के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए दोनों प्रदेशों के मजबूत अतीत के संबंधों को दोहराया।
उन्होंने निवेशकों को बताया कि प्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए व्यवस्थाओं को सरल बनाया गया है। इस वर्ष ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, भोपाल के दौरान ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत 18 नई नीतियां लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सरलीकृत व्यवस्थाएं तेज गति से निवेश ला रही हैं।
डॉ. यादव ने विशेष रूप से नर्मदापुरम जिले के मोहासा-बाबई में स्थित, भारत के पहले ‘मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन फॉर पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट’ के बहुप्रतीक्षित फेज़ 2 में निवेश के लिए निमंत्रण दिया, जिसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर 2025 है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2025 को ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ घोषित किया गया है।
इस इंटरेक्टिव सत्र में सन फार्मा के अध्यक्ष श्री दिलीप सांघवी, सीआईआई के अध्यक्ष श्री नील सी. रहेजा, हिंडाल्को के प्रबंध निदेशक श्री सतीश पाई समेत 400 से अधिक शीर्ष निवेशक और उद्योगपति शामिल हुए। कार्यक्रम में डिप्लोमेट्स और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माताओं के साथ 2 राउंडटेबल मीटिंग और 20 से अधिक वन-टू-वन मीटिंग भी आयोजित की गईं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र की औद्योगिक विशेषज्ञता और मध्य प्रदेश की अनंत संभावनाएं मिलकर ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को गति देंगी।