लखनऊ में भारत के रक्षा उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ, ब्रह्मोस मिसाइल के पहले बैच को हरी झंडी दिखाई। यह मिसाइलें लखनऊ में स्थापित ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी सेंटर में स्वदेशी रूप से निर्मित की गई हैं। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
प्रमुख घोषणाएं और महत्व
इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- शक्ति का प्रतीक: उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल को सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती स्वदेशी क्षमताओं का प्रतीक बताया और इसे सेना, नौसेना और वायु सेना की रीढ़ कहा।
- पाकिस्तान को चेतावनी: रक्षा मंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अब “पाकिस्तान का एक-एक इंच क्षेत्र हमारे ब्रह्मोस की पहुंच में है।” उन्होंने हाल ही के एक सैन्य ऑपरेशन का जिक्र करते हुए कहा कि वह तो बस एक “ट्रेलर” था।
- तेज़ उत्पादन: मई 2025 में इस सुविधा का उद्घाटन होने के मात्र पाँच महीने के भीतर ही मिसाइलों का पहला बैच तैयार हो गया, जो भारत की रक्षा निर्माण गति को दर्शाता है।
- आर्थिक प्रभाव:
- यह सुविधा लगभग 200 एकड़ में ₹380 करोड़ की लागत से बनाई गई है।
- यहां प्रति वर्ष लगभग 100 मिसाइल सिस्टम का उत्पादन करने का लक्ष्य है।
- अगले वित्तीय वर्ष से इस इकाई का अनुमानित टर्नओवर लगभग ₹3,000 करोड़ होगा, जिससे लगभग ₹500 करोड़ का GST राजस्व प्राप्त होगा।
- निर्यात में वृद्धि: राजनाथ सिंह ने खुलासा किया कि ब्रह्मोस टीम ने पिछले महीने में ही दो विदेशी देशों के साथ लगभग ₹4,000 करोड़ के निर्यात अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।
उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारा
यह सुविधा उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो राज्य में औद्योगिक विकास और रोज़गार को बढ़ावा दे रही है। राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर बूस्टर बिल्डिंग का भी उद्घाटन किया और मिसाइल उत्पादन प्रक्रिया का प्रदर्शन देखा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को रक्षा उत्पादन केंद्र बनाने में सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आभार व्यक्त किया।