भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं को मजबूती देते हुए, 11वें गोला-बारूद सह टॉरपीडो सह मिसाइल (एसीटीसीएम) बार्ज, एलएसएएम 25 (यार्ड 135) की डिलीवरी नौसेना डॉकयार्ड, मुंबई में आयोजित एक समारोह के दौरान की गई।
इस परियोजना के माध्यम से भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला है। इन बार्जों का निर्माण और डिजाइन पूरी तरह से स्वदेशी है।
- निर्माण और डिजाइन:
- इन बार्जों का निर्माण एक एमएसएमई (MSME) शिपयार्ड, मेसर्स सूर्यादिप्ता प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, ठाणे द्वारा किया गया है।
- शिपयार्ड ने एक भारतीय शिप डिजाइन फर्म के सहयोग से इन्हें स्वदेशी रूप से डिजाइन किया है।
- इनकी समुद्री योग्यता सुनिश्चित करने के लिए नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला, विशाखापत्तनम में सफलतापूर्वक मॉडल परीक्षण भी किया गया है।
- ये बार्ज भारतीय नौवहन रजिस्टर (आईआरएस) के नौसेना नियमों के अनुरूप बनाए गए हैं।
भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता:
यह डिलीवरी भारतीय नौसेना की एमएसएमई को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 5 मार्च 2021 को कुल 11 एसीटीसीएम बार्जों के निर्माण का अनुबंध किया गया था, जिनमें से 10 पहले ही डिलीवर किए जा चुके हैं। शिपयार्ड को भारतीय नौसेना के लिए चार सलेज बार्ज बनाने का अनुबंध भी मिला है।
परिचालन महत्व:
इन बार्जों को शामिल करने से भारतीय नौसेना की परिचालन प्रतिबद्धता को बल मिलेगा। ये बार्ज जेटी और बाहरी बंदरगाहों पर भारतीय नौसेना के प्लेटफॉर्मों तक आवश्यक वस्तुओं और गोला-बारूद/टॉरपीडो/मिसाइलों के परिवहन और उन्हें चढ़ाने/उतारने में सुविधा प्रदान करेंगे।