भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास परिसर में आयोजित ‘सोयाबीन पर भावांतर भुगतान के उपलक्ष्य में’ किसान आभार सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसानों के हित में कई बड़े कदम उठाए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसान मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका हित सर्वोपरि है।
भावांतर योजना का विस्तार:
- मुख्यमंत्री ने कहा कि भावांतर योजना किसानों को खुले बाजार में फसलों की कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देती है और यह सरकार की एक बड़ी पहल है।
- उन्होंने कहा कि पहले फसल का सीजन निकल जाने पर मुआवजा मिलता था, लेकिन अब सोयाबीन की फसल कटने से पहले ही राहत राशि बांटना शुरू कर दिया गया है।
- सोयाबीन किसानों को राहत: पिछली बार 2 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, वहीं भावांतर योजना दोबारा शुरू होने पर इस बार 9 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों ने पंजीयन कराया है।
- भुगतान की गारंटी: सोयाबीन किसान 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक अपनी उपज मंडियों में बेच सकेंगे। भावांतर की राशि 15 दिनों के भीतर सीधे आधार से लिंक बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी।
ऊर्जादाता किसान: सोलर पंप पर रिकॉर्ड सब्सिडी:
- अनुदान में वृद्धि: किसानों के हित में बड़ी घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने सोलर पावर पंप की स्थापना पर सब्सिडी 40% से बढ़ाकर 90% करने की बात कही।
- अधिक क्षमता: किसानों को विद्युत पंप से एक स्टेप अधिक पावर कैपेसिटी का सोलर पंप मिलेगा (3 HP वाले को 5 HP और 5 HP वाले को 7.5 HP का)।
- लक्ष्य: राज्य सरकार ने किसानों को 32 लाख सोलर पंप देने का लक्ष्य रखा है।
- अतिरिक्त बिजली बेचें: मुख्यमंत्री ने किसानों को सोलर पंप लगाकर अतिरिक्त बिजली सरकार को बेचने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
सिंचाई और कृषि विकास:
- सिंचाई का रकबा 52 लाख हेक्टेयर तक सिंचित हुआ है, और इसे 100 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य है।
- नदी जोड़ो परियोजनाएं: पार्वती-काली सिंध-चंबल (पीकेसी), केन-बेतवा और ताप्ती मेगा रिचार्ज जैसी 3 बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया है ताकि हर खेत तक पानी पहुंचे।
- फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स: फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स भी स्थापित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की खुशहाली ही हमारे विकास का आधार है, और यह मुख्यमंत्री निवास नहीं, किसानों का अपना आवास है।