अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा
समुद्र भारत के वाणिज्य की जीवनरेखा है। देश का लगभग 95% व्यापार परिमाण के आधार पर और लगभग 70% मूल्य के आधार पर समुद्री मार्गों से होता है। यह तथ्य भारत की राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास में बंदरगाहों और जहाजरानी की दक्षता की केंद्रीय भूमिका को स्पष्ट करता है।
विजन 2030: एक परिवर्तनकारी रोडमैप
भारत ने 2021 में ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ (MIV 2030) लॉन्च किया। यह 150 से अधिक रणनीतिक पहलों का एक रोडमैप है, जिसमें 3 से 3.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। इसके मुख्य स्तंभ हैं:
- बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि।
- जहाजरानी क्षमता का विस्तार और बेड़े को मजबूत करना।
- अंतर्देशीय जलमार्गों का सुदृढ़ीकरण और बहु-विध परिवहन को बढ़ावा देना।
इस विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हालिया 69,725 करोड़ रुपये का जहाज निर्माण पैकेज है, जिसमें समुद्री विकास कोष (MDF), संशोधित जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (SBFAS), और जहाज निर्माण विकास योजना (SBDS) शामिल हैं।
प्रगति: एक दशक की अभूतपूर्व वृद्धि (2014-2025)
पिछले एक दशक में समुद्री क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है:
| संकेतक | 2014 का आँकड़ा | 2025 का आँकड़ा | सुधार/वृद्धि |
| बंदरगाह क्षमता | 140 करोड़ मीट्रिक टन | 276.2 करोड़ मीट्रिक टन | लगभग दोगुना |
| माल ढुलाई (कुल) | 97.2 करोड़ मीट्रिक टन | 159.4 करोड़ मीट्रिक टन | महत्वपूर्ण वृद्धि |
| फेरे का औसत समय | 93 घंटे | 48 घंटे | 50% से अधिक की कमी |
| शुद्ध वार्षिक सरप्लस | 1026 करोड़ रुपये | 9352 करोड़ रुपये | लगभग 9 गुना वृद्धि |
| समुद्री कामगार | 1.25 लाख | 3 लाख से अधिक | भारत शीर्ष तीन आपूर्तिकर्ताओं में |
| चालू जलमार्ग | 3 | 29 | 710% माल ढुलाई वृद्धि (IWT) |
सागरमाला कार्यक्रम, MIV 2030 का एक प्रमुख स्तंभ है, जिसके तहत 2035 तक 5.8 लाख करोड़ रुपये की 840 परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।
अमृत काल 2047: भविष्य की तैयारी
MIV 2030 की सफलता पर आधारित ‘समुद्री अमृत काल विजन 2047’ एक दीर्घकालिक रोडमैप है। इसमें 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है और यह 300 से अधिक कार्यान्वयन योग्य पहलों को रेखांकित करता है।
मुख्य फोकस हरित प्रौद्योगिकियों और संवहनीय संचालन पर है, जैसे:
- ग्रीनफील्ड पोर्ट्स (जैसे ओडिशा में बाहुदा)।
- प्रमुख बंदरगाहों पर हरित हाइड्रोजन बंकरिंग।
- मेथनॉल-ईंधन वाले जहाजों का उपयोग।
- इलेक्ट्रिक नौकाओं पर आधारित जल मेट्रो परियोजनाएँ (जैसे पटना में)।
ये रणनीतिक कदम भारत को 2047 तक वैश्विक समुद्री और जहाज निर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य को सुनिश्चित करते हैं।