भोपाल, रविवार, 2 नवम्बर 2025 । राजधानी के लाल परेड ग्राउंड पर पहली बार आयोजित सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि महान सम्राट विक्रमादित्य ने वीरता, दानशीलता, न्याय, शौर्य और सुशासन का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दो हजार साल पुरानी यह गाथा आज जीवंत हो उठी है। कलाकारों ने अश्व दल का उपयोग कर और सशस्त्र सेना का जीवंत अभिनय कर मंच को साकार कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि सम्राट विक्रमादित्य ने ही शकों को पराजित कर भारत को गुलामी की काली छाया से मुक्त कराया था। उन्होंने न केवल अपने नागरिकों को ऋण मुक्त किया, बल्कि राष्ट्र के कल्याण के लिए विक्रम संवत भी प्रारंभ किया।
यह महानाट्य, जिसका निर्देशन श्री संजीव मालवीय ने किया, 150 कलाकारों, भव्य सेट (जैसे महाकाल मंदिर का प्रतिरूप) और पशु-दल के साथ प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि आज हम जनकल्याण और सुशासन की जो बात करते हैं, उसकी प्रेरणा हमें अपने वैभवशाली अतीत के महानायक सम्राट विक्रमादित्य से ही मिलती है। मंचन में बेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी की कथाओं में वर्णित उनके विवेकपूर्ण न्याय और शौर्य की गाथाओं को भी दर्शाया गया।