भारत और लक्जमबर्ग ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष नवाचार में संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 6 नवंबर 2025 को लक्जमबर्ग के राजदूत श्री क्रिश्चियन बीवर से मुलाकात की, जिसमें यूरोपीय बाजारों में भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर विशेष विचार-विमर्श हुआ।
रणनीतिक तालमेल:
- लक्ष्य: भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम को यूरोप की उन्नत अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था से जोड़ना।
- लक्जमबर्ग का लाभ: डॉ. जितेंद्र सिंह ने लक्जमबर्ग को भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के लिए यूरोपीय बाज़ारों, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) और निवेश के अवसरों तक पहुँचने का “प्रवेश द्वार” बताया।
- मुख्य क्षेत्र: साइबर सुरक्षा, क्वांटम प्रौद्योगिकी, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उच्च-नवाचार क्षेत्रों में संयुक्त पहल पर सहमति बनी।
भारत का बढ़ता कद:
मंत्री महोदय ने ज़ोर दिया कि भारत वैज्ञानिक प्रकाशन और स्टार्टअप गतिविधियों में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है, जो इसे वैश्विक सहयोग के लिए एक आकर्षक केंद्र बनाता है। उन्होंने अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता का भी उल्लेख किया, जिसने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में अग्रणी स्थापित किया है।
द्विपक्षीय पृष्ठभूमि:
भारत और लक्जमबर्ग के राजनयिक संबंध 1948 से चले आ रहे हैं। नवंबर 2020 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुए वर्चुअल शिखर सम्मेलन ने वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खोले थे।
वर्तमान में, दोनों देश 2022 के अंतरिक्ष समझौता ज्ञापन के बाद सक्रिय साझेदारी साझा करते हैं, जिसके तहत भारत के रॉकेट से लक्जमबर्ग के दो उपग्रहों का प्रक्षेपण भी किया गया है।