वंदे मातरम् सिर्फ राष्ट्रगीत नहीं, हमारा प्राण गीत है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

वंदे मातरम् सिर्फ राष्ट्रगीत नहीं, हमारा प्राण गीत है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

150वें स्मरणोत्सव पर शौर्य स्मारक में राज्य स्तरीय समारोह; मुख्यमंत्री ने दिलाई स्वदेशी की शपथ।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को शौर्य स्मारक में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150वें स्मरणोत्सव पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वंदे मातरम् हर भारतीय की चेतना का स्वर और प्राण गीत है। उन्होंने कहा कि यह वह उद्घोष था जिसने पराधीन भारत की धमनियों में स्वाभिमान का रक्त प्रवाहित किया और देश में आजादी की अलख जगाई।

मुख्यमंत्री ने स्मरण कराया कि स्वतंत्रता सेनानी बंकिमचंद्र चटर्जी ने वर्ष 1875 में अपने उपन्यास “आनंद मठ” में इस अमर गीत की रचना की थी, जिससे क्रांति का शंखनाद हुआ। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर आज इस गीत के 150वें स्मरणोत्सव के विशेष आयोजन किए जा रहे हैं।

समारोह की मुख्य गतिविधियाँ:

  • मुख्यमंत्री ने “वंदे मातरम्-एक क्रांति गीत का साहित्येतिहासिक अध्ययन” नामक पुनर्मुद्रित पुस्तिका का विमोचन किया।
  • समारोह में वंदे मातरम् गीत की 120 साल प्राचीन दुर्लभ रिकॉर्डिंग प्रसारित की गई।
  • हार्मनी ग्रुप के 150 कलाकारों ने गीत के मूल स्वरूप के साथ ही तमिल, मलयालम और अन्य भारतीय भाषाओं में सांगीतिक प्रस्तुति दी।
  • डॉ. यादव ने उपस्थित जनसमूह को स्वदेशी की शपथ दिलाई।
  • मुख्यमंत्री ने भोपाल से वर्चुअली जुड़कर नई दिल्ली में आयोजित प्रधानमंत्री श्री मोदी की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम में भी भागीदारी की।

डॉ. यादव ने घोषणा की कि 7 नवंबर से शुरू हुआ यह 150वां स्मरणोत्सव पूरे प्रदेश में 7 नवंबर 2026 तक चार चरणों में मनाया जाएगा।

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