मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को सिंचाई के क्षेत्र में ‘इतिहास रचने’ की ओर अग्रसर बताया है। सोमवार को मंत्रालय में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की बैठकों की अध्यक्षता करते हुए, मुख्यमंत्री ने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और समयबद्ध कार्यप्रणाली पर जोर दिया।
हरदा की ‘शहीद ईलाप सिंह परियोजना’ से क्रांति
- मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हरदा जिला जल्द ही प्रदेश का पहला शत-प्रतिशत सिंचित जिला बनेगा।
- शहीद ईलाप सिंह माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना इस लक्ष्य की कुंजी है, जिसकी लागत करीब ₹756.76 करोड़ है।
- परियोजना 39,976 हेक्टेयर रकबे में स्थायी सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी, जिसमें तवा सिंचाई परियोजना के अंतिम छोर (टेल एण्ड एरिया) और कमांड एरिया से वंचित किसान भी शामिल होंगे।
- बीते 16 महीनों में 42% से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।
मॉनिटरिंग और वित्तीय समन्वय पर जोर
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन सभी सिंचाई परियोजनाओं को तय समय-सीमा में ही पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए और समय वृद्धि न करने की चेतावनी दी। उन्होंने:
- निर्माणाधीन परियोजनाओं की वित्तीय ज़रूरतों के लिए एशियन और अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक संस्थाओं से उच्च स्तर का समन्वय स्थापित करने को कहा।
- विभागीय अधिकारियों को केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के साथ सतत् समन्वय बनाए रखने और ‘फोक्स्ड’ होकर कार्य करने के निर्देश दिए।
सिंहस्थ 2028 और नदी लिंक परियोजनाएँ
- सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत, उज्जैन में शिप्रा नदी के घाटों और जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण कार्य दिसंबर 2027 तक अनिवार्य रूप से पूरे किए जाने चाहिए।
- उन्होंने पड़ौसी राज्यों के साथ संयुक्त नदी-लिंक परियोजनाओं पर सक्रियता से कार्य करने पर बल दिया, खासकर पार्वती, कालीसिंध और चंबल राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना में बड़नगर को शामिल करने का सुझाव दिया।
- उन्होंने चित्रकूट और मंदाकिनी नदी पर संयुक्त सिंचाई परियोजना के लिए उत्तरप्रदेश सरकार से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया।
सिंचाई का विस्तार और प्रगति
जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि पिछले 2 वर्षों में ₹6,640 करोड़ खर्च करके हरदा, बड़वानी और धार के जनजातीय अंचलों में लगभग 2 लाख हेक्टेयर रकबे में सिंचाई उपलब्ध कराई गई है, जिससे लगभग 600 गांवों को लाभ मिला है।
- अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि निर्माणाधीन स्लीमनाबाद टनल का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है और इसे 31 जनवरी 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
- नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना (96% पूर्ण), आईएसपी-कालीसिंध उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना (96% पूर्ण) और डही उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना (95% पूर्ण) सहित कई बड़ी परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं।
- ₹12,000 करोड़ के परियोजना प्रस्ताव केंद्र के जलशक्ति मंत्रालय को भेजे गए हैं, जिनकी डीपीआर स्वीकृति पर यह परियोजना केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी लिंक का हिस्सा बनेगी।