स्वच्छ ऊर्जा क्रांति में मध्य प्रदेश अग्रणी: नीमच बन रहा सौर ऊर्जा हब, हरित ऊर्जा उत्पादन 12 वर्षों में 19 गुना बढ़ा

स्वच्छ ऊर्जा क्रांति में मध्य प्रदेश अग्रणी: नीमच बन रहा सौर ऊर्जा हब, हरित ऊर्जा उत्पादन 12 वर्षों में 19 गुना बढ़ा

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। राज्य की कुल 31,000 मेगावॉट ऊर्जा क्षमता में हरित ऊर्जा का योगदान 30 प्रतिशत से अधिक है।

नीमच बना सौर ऊर्जा का केंद्र: मध्य प्रदेश में नीमच जिला 500 मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ हरित ऊर्जा उत्पादन का एक प्रमुख हब बन गया है। जिले की सिंगोली (170 मेगावॉट), बड़ावदा (160 मेगावॉट) और कवई (170 मेगावॉट) परियोजनाओं से यह उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा, आगर जिले में 330 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। टी.सी. सूर्या कंपनी द्वारा स्थापित ये परियोजनाएँ प्रतिवर्ष 68 मिलियन यूनिट हरित बिजली का उत्पादन कर रही हैं।

जावद जनपद के ग्राम भगवानपुरा में वेल्सपन सोलर एमपी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित 151 मेगावॉट क्षमता की सौर इकाई फरवरी 2014 से कार्यरत है, जो प्रतिवर्ष 2 लाख 16 हजार 372 टन कार्बन उत्सर्जन कम कर रही है।

अक्षय ऊर्जा में अभूतपूर्व वृद्धि: भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में बढ़ते हुए, मध्य प्रदेश ने अपनी ऊर्जा नीति, तकनीकी नवाचार और निवेशक-हितैषी दृष्टिकोण के बल पर पिछले 12 वर्षों में हरित ऊर्जा उत्पादन में 19 गुना की वृद्धि दर्ज की है।

प्रमुख परियोजनाएँ:

  • रीवा सोलर पार्क: देश के सबसे बड़े और सफल पार्कों में से एक, जहाँ से दिल्ली मेट्रो को बिजली की आपूर्ति की जाती है।
  • ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट: देश का सबसे बड़ा 278 मेगावॉट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट, जो जलाशयों के उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • मुरैना परियोजना: देश की पहली ‘सोलर प्लस बैटरी स्टोरेज’ परियोजना स्थापित की जा रही है, जो ₹2.70 प्रति यूनिट की दर से 24 घंटे हरित ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।

निवेशक-हितैषी नीति और भविष्य का लक्ष्य: मध्य प्रदेश ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 20 गीगावॉट हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। पंप-हाइड्रो परियोजनाओं के लिए 14,850 मेगावॉट और बायोफ्यूल के लिए 6,500 टन प्रतिदिन क्षमता प्रस्तावित की गई है। ‘सूर्य मित्र योजना’ और आईटीआई सहयोग कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय रोजगार के अवसर भी दिए जा रहे हैं।

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