मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ कार्यशाला को किया संबोधित: गांवों को बनाया जाएगा ‘स्वराज’ की प्रथम इकाई

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ कार्यशाला को किया संबोधित: गांवों को बनाया जाएगा ‘स्वराज’ की प्रथम इकाई

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में पंचायतों को सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवस्था की मूल आत्मा स्थानीय स्वशासन में निहित है, जहां शासन गांव से शुरू होता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए पंचायतों को प्रशासनिक और वित्तीय रूप से सक्षम बनाया जा रहा है।

मुख्य घोषणाएं और पहल:

  • निरीक्षण सुझावों को शामिल करना: जिला और जनपद पंचायतों के उपाध्यक्षों द्वारा शिक्षा समितियों के निरीक्षण के दौरान दिए गए सुझावों को अब लिपिबद्ध किया जाएगा और उन पर कार्रवाई होगी।
  • सरपंचों को अधिकार: सरपंचों को पंचायत की गतिविधियों पर खर्च करने के लिए ₹25 लाख तक की राशि खर्च करने का अधिकार दिया गया है।
  • मास्टर प्लान: निवेश और निवास की बेहतर व्यवस्था के लिए पंचायतें मास्टर प्लान तैयार करें, जिसकी शुरुआत विदिशा जिले से होगी।
  • सोलर पंप योजना: किसानों को 3 से 5 हॉर्स पावर के सोलर पंप पर 90% तक का अनुदान मिलेगा। पंचायतें इस योजना को आगे बढ़ाएं।
  • अन्य पहल: ‘एक बगिया मां के नाम’ पहल पर ग्राम स्तर पर काम करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और संस्थाओं को भी पुरस्कृत किया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने दिसंबर 2026 तक हर पंचायत में श्मशान घाट बनाने के संकल्प और ₹6000 करोड़ की पंचम वित्त की राशि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदर्श आत्मनिर्भर पंचायत के लिए स्वच्छता, नशामुक्ति और सामाजिक बुराइयों को रोकने पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।

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