नई दिल्ली: भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह के साथ मना रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराया, जिसके बाद 21 तोपों की सलामी और राष्ट्रगान के साथ समारोह का आगाज हुआ। इस अवसर पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उनकी वीरता के लिए ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया। इस वर्ष यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कर्तव्य पथ पर पहली बार यूरोपीय संघ का दस्ता
भारत की कूटनीतिक मजबूती का परिचय देते हुए परेड में पहली बार यूरोपीय संघ (EU) का सैन्य दस्ता शामिल हुआ। कर्नल फ्रेडरिक साइमोन स्प्रुइट के नेतृत्व में EU के ध्वजवाहक तीन जिप्सियों पर सवार होकर निकले। उनके पास यूरोपीय संघ, EU मिलिट्री स्टाफ और अटलांटा व एस्पाइड्स नौसेना बलों के झंडे थे।
वेटरन्स की झांकी: पूर्व सैनिकों के योगदान को सलाम करते हुए ‘संग्राम से राष्ट्रनिर्माण तक’ थीम पर आधारित झांकी निकाली गई। इसके अग्रभाग में 3D गोलाकार दीवार और ‘अमर जवान ज्योति’ के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, जबकि पिछला हिस्सा राष्ट्र निर्माण में दिग्गजों की निरंतर सेवा को समर्पित था।
90 मिनट तक चले इस समारोह की थीम ‘वंदे मातरम’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर आधारित थी। परेड में स्वदेशी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर, धनुष गन सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल का प्रदर्शन किया गया। वायुसेना के फ्लाई-पास्ट में सुखोई-30 और राफेल सहित 29 विमानों ने आसमान में करतब दिखाए। पहली बार परेड में अग्निवीर महिला संगीतकारों ने ‘साउंड बैरियर’ धुन बजाकर इतिहास रचा। नौसेना की झांकी में स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और 5वीं शताब्दी के सिला हुआ जहाज ‘आईएनएसवी कौंडिन्य’ आकर्षण का केंद्र रहे।