भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ की रूपरेखा तय की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के विकास और भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार है।
प्रमुख निर्णय और निर्देश:
- अतिक्रमण पर प्रहार: मुख्यमंत्री ने जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment areas) से तत्काल अतिक्रमण हटाने और उन पर सतत निगरानी रखने के कड़े निर्देश दिए।
- नदी पुनर्जीवन: नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित करने और वहां सघन वृक्षारोपण करने की योजना बनाई गई है। विशेष रूप से बेतवा, क्षिप्रा और गंभीर नदियों के पुनरुद्धार के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
- अभियान का कैलेंडर: अभियान 19 मार्च (वर्ष प्रतिपदा) से शुरू होगा। इसमें 23-24 मई को भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन और 26 मई को उज्जैन में ‘महादेव नदी कथा’ जैसे प्रमुख आयोजन होंगे।
- विभागीय लक्ष्य: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 170 करोड़ रुपये की लागत से 2200 नए कार्य करेगा, जबकि पूर्व में जारी 2500 करोड़ रुपये के 86 हजार से अधिक खेत-तालाबों और अमृत सरोवरों को पूर्ण किया जाएगा।