पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच भारत सरकार और घरेलू विमानन कंपनियां हाई-अलर्ट पर हैं। नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइंस के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि युद्ध जैसी स्थितियों या परिचालन संबंधी बाधाओं के बावजूद भारतीय नागरिकों को वापस लाने का सिलसिला जारी रहे।
रणनीतिक कदम: मंत्रालय केवल उड़ानों के संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ‘प्राइस कैपिंग’ जैसी स्थिति पर भी नजर रख रहा है ताकि संकट के समय टिकटों के दाम न बढ़ें। एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा और इंडिगो जैसी कंपनियां परिचालन व्यवहार्यता के आधार पर अपनी उड़ानों का समय तय कर रही हैं।
भविष्य की तैयारी: मंत्रालय ने बताया कि 7 मार्च से 9 मार्च के बीच औसतन 50 उड़ानें प्रतिदिन संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, जेद्दा, फुजैरा और अबू धाबी जैसे हवाई अड्डों की जमीनी रिपोर्ट लगातार ली जा रही है। मंत्रालय ने यात्रियों से धैर्य बनाए रखने और एयरलाइंस से निरंतर संवाद करने का आग्रह किया है।