प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों के विदाई सत्र को संबोधित किया। अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी भावुक नजर आए और उन्होंने निवर्तमान सांसदों के संसदीय योगदान की जमकर सराहना की। प्रधानमंत्री ने विदा हो रहे सदस्यों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति में कभी “पूर्ण विराम” (Full Stop) नहीं लगता, बल्कि अनुभव का नया अध्याय शुरू होता है।
सदन की परंपरा और विरासत: पीएम मोदी ने राज्यसभा की अनूठी व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहाँ हर दो साल में एक बड़ा समूह विदा होता है, जिससे नए आने वाले सदस्यों को वरिष्ठ साथियों से सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने इसे एक सतत चलने वाली ‘विरासत’ करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 6 साल का कार्यकाल न केवल नीति-निर्माण में योगदान देने का अवसर है, बल्कि यह एक अमूल्य अनुभव है जो व्यक्ति के जीवन को समृद्ध बनाता है।
वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख: संबोधन के दौरान पीएम ने एच.डी. देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने अपने जीवन का आधा हिस्सा संसदीय प्रणाली को दिया है और नए सांसदों को उनके समर्पण और अनुशासन से सीखना चाहिए।