भारतीय शेयर बाजार के लिए 19 मार्च का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों में 3.26% की भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 2497 अंक टूटकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 776 अंक फिसलकर 23,002 के स्तर पर आ गया। 4 जून 2024 के बाद यह बाजार की सबसे बड़ी गिरावट है।
बाजार में मचे इस हाहाकार की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें 6% उछलकर 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। वैश्विक बाजारों (एशियाई और अमेरिकी) में बिकवाली का सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखा।
बैंकिंग सेक्टर में गिरावट का नेतृत्व HDFC बैंक ने किया। बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे और बैंक के कामकाज पर उठाए गए सवालों के बाद शेयर 5% से ज्यादा गिर गया। इस भारी गिरावट के कारण BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 439 लाख करोड़ से घटकर 426 लाख करोड़ रह गया, जिससे निवेशकों को एक ही दिन में 13 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।