पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला को बिना किसी रुकावट के जारी रखना था।
बैठक के मुख्य बिंदु:
- सक्रिय निगरानी: सरकार वैश्विक स्तर पर हो रही उथल-पुथल पर पैनी नजर रख रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं और उद्योगों पर न पड़े।
- आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण: समुद्री मार्गों, विशेष रूप से ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में संभावित खतरों को देखते हुए लॉजिस्टिक्स और वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
- रणनीतिक भंडार: भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना वैश्विक व्यापार के लिए अनिवार्य है। भारत अब अपनी निर्भरता को केवल खाड़ी देशों तक सीमित न रखकर रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ा चुका है, जिससे वर्तमान में 70% आयात खाड़ी के बाहर से हो रहा है।