कुवैत में मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए भारत की राजदूत परमिता त्रिपाठी ने कुवैत एयरवेज के चेयरमैन कैप्टन अब्दुलमोहसेन एस अलफगान के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब कुवैत का हवाई क्षेत्र लगातार बंद है और उड़ान सेवाएं प्रभावित हैं।
रविवार को हुई इस बैठक का उद्देश्य एयरलाइंस के साथ समन्वय स्थापित कर उड़ानों को जल्द से जल्द फिर से शुरू करने के विकल्पों पर चर्चा करना था। खासतौर पर कुवैत में रह रहे भारतीय नागरिकों की आवाजाही को सुचारू बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक के दौरान राजदूत परमिता त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि कुवैत में बसे भारतीय समुदाय की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण भारतीय दूतावास की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने वर्तमान खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष से उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसी संदर्भ में भारत सरकार ने विदेशी नागरिकों के लिए कई राहत उपायों की घोषणा की है। इनमें वीजा विस्तार, जुर्माने में छूट, निकास अनुमति और नियमों में अस्थायी ढील जैसे प्रावधान शामिल हैं। साथ ही उड़ानों के मार्ग बदलने की स्थिति में अस्थायी लैंडिंग अनुमति भी दी जा रही है।
निर्देशों के अनुसार, सभी प्रकार के वीजा—जिसमें ई-वीजा भी शामिल हैं—जिनकी वैधता जल्द समाप्त होने वाली है, उन्हें बिना किसी शुल्क के एक महीने तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए संबंधित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) की मंजूरी आवश्यक होगी।
इसके अलावा, 28 फरवरी 2026 के बाद भारत में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक ठहरे विदेशी नागरिकों पर लगने वाले जुर्माने को माफ करने का निर्णय लिया गया है। प्रभावित व्यक्तियों को बिना शुल्क निकास अनुमति भी दी जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन विशेष परिस्थितियों में वीजा विस्तार या निकास अनुमति प्राप्त न कर पाना आव्रजन नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। इसके साथ ही, जो विदेशी नागरिक उड़ानों के मार्ग में बदलाव के कारण भारत पहुंचते हैं, उन्हें अस्थायी लैंडिंग परमिट (टीएलपी) भी मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा।