अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष से अमेरिकी सैनिक आने वाले कुछ हफ्तों में वापस बुलाए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने अपना सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य—ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकना—पूरा कर लिया है। ट्रंप ने कहा कि मिशन अपने अंतिम चरण में है और इसे पूरा होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
ट्रंप ने बताया कि लगातार हमलों के कारण ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। उनके अनुसार, अब ईरान के पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं बची है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अंदर सत्ता में बदलाव आया है और अब बातचीत के लिए अधिक समझदार नेतृत्व मौजूद है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की कार्रवाई केवल तत्काल प्रभाव के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक ईरान को कमजोर बनाए रखने के लिए की गई है। ट्रंप ने बातचीत के जरिए समझौते की संभावना से इनकार नहीं किया, लेकिन यह भी कहा कि सेना की वापसी किसी समझौते पर निर्भर नहीं करेगी।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को इतना पीछे धकेल दिया है कि उसे दोबारा उभरने में 15 से 20 साल लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई जरूरी थी ताकि एक खतरनाक स्थिति को रोका जा सके।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकाने नष्ट हो चुके हैं। अब उसके पास न प्रभावी नौसेना बची है, न वायुसेना और न ही मजबूत रक्षा प्रणाली। ट्रंप ने कहा कि ईरान की संचार व्यवस्था और हवाई सुरक्षा प्रणाली भी खत्म हो चुकी है, जिससे अमेरिकी विमानों को पूरी तरह से नियंत्रण मिल गया है।