मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकल्प व्यक्त किया है कि वर्ष 2028 तक मध्यप्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनाया जाएगा। राज्य सरकार पशुपालन को खेती के साथ आय का मुख्य जरिया बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में अब ‘पशुपालन विभाग’ का नाम बदलकर ‘गौपालन विभाग’ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश के कुल दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने प्रदेश में ‘स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025’ लागू की है, जिसके तहत बड़े शहरों में 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं बनाई जा रही हैं। ग्वालियर की आदर्श गौशाला में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है। सांची ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ अनुबंध किया गया है। इसके अलावा, गौशालाओं के लिए अनुदान राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश कर दिया गया है।