एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेतों के बीच भारत के मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के कारण क्षेत्र की ग्रोथ पर दबाव बना हुआ है, लेकिन भारत इस माहौल में भी आगे निकल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि दर 2025 में 5.4 प्रतिशत थी, जो घटकर 2026 और 2027 में 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके विपरीत भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है और 2027 में यह दर 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। इसका मुख्य कारण देश में मजबूत घरेलू खपत बताया गया है।
एडीबी के अनुसार, जहां अधिकांश एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, वहीं भारत अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में रहेगा। क्षेत्र में स्थिर श्रम बाजार, मजबूत घरेलू मांग और बढ़ते बुनियादी ढांचा निवेश से कुछ सहारा मिल रहा है, लेकिन जोखिम अभी भी बने हुए हैं।
रिपोर्ट में चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर भी अनुमान दिया गया है। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की वृद्धि दर 2025 के 5 प्रतिशत से घटकर 2026 में 4.6 प्रतिशत और 2027 में 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसके पीछे प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी और निर्यात में गिरावट प्रमुख कारण बताए गए हैं।
एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष ऊर्जा और खाद्य कीमतों को बढ़ा सकता है, जिससे वित्तीय परिस्थितियां और खराब हो सकती हैं। इसके अलावा वैश्विक व्यापार नीतियों में अस्थिरता भी क्षेत्रीय विकास के लिए खतरा बनी हुई है।
हालांकि, निजी खपत में मजबूती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग से अर्थव्यवस्थाओं को कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद है। तेल की कीमतें फिलहाल ऊंची रह सकती हैं, लेकिन यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है तो आगे स्थिरता संभव है।