एमपी के छात्रों ने श्रीहरिकोटा में सीखी रॉकेट लॉन्चिंग की तकनीक, ‘विज्ञान मंथन यात्रा’ से संवर रहा भविष्य

एमपी के छात्रों ने श्रीहरिकोटा में सीखी रॉकेट लॉन्चिंग की तकनीक, ‘विज्ञान मंथन यात्रा’ से संवर रहा भविष्य

मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकास्ट) द्वारा आयोजित ‘विज्ञान मंथन यात्रा’ प्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों के लिए वैज्ञानिक चेतना और प्रेरणा का प्रमुख आधार बन गई है। इस यात्रा के माध्यम से छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीकी विकास का प्रत्यक्ष अनुभव मिल रहा है। यात्रा के हालिया चरण में विद्यार्थियों ने आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र और चेन्नई के बी.एम. बिरला प्लैनेटोरियम का भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने ब्रह्मांड के रहस्यों और भारत की अंतरिक्ष शक्ति को करीब से देखा।

श्रीहरिकोटा के भ्रमण के दौरान छात्रों ने भारत के इस प्रमुख प्रक्षेपण केंद्र की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और कार्यप्रणाली का अध्ययन किया। बंगाल की खाड़ी के निकट स्थित इस केंद्र की भूमध्य रेखा से नजदीकी इसे ईंधन बचत और अधिक पेलोड क्षमता के लिए वैश्विक स्तर पर अनुकूल बनाती है। छात्रों को यहाँ प्रथम और द्वितीय लॉन्च पैड की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया गया। उन्होंने सीखा कि कैसे प्रथम लॉन्च पैड मुख्य रूप से पीएसएलवी (PSLV) के लिए उपयोग होता है, जबकि द्वितीय लॉन्च पैड ‘यूनिवर्सल लॉन्च सिस्टम’ से लैस है, जहाँ से जीएसएलवी (GSLV) और एलवीएम-3 (LVM-3) जैसे भारी यान अंतरिक्ष में भेजे जाते हैं।

मिशन कंट्रोल सेंटर में विद्यार्थियों ने जाना कि कैसे एक-एक सेकंड की रीयल-टाइम निगरानी के साथ प्रक्षेपण प्रक्रिया पूरी की जाती है। इस दौरान मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने छात्रों को भारतीय वैज्ञानिक विरासत का महत्व बताया और उन्हें नवाचार व अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स की दिशा में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अनुभव ने छात्रों के मन में अनुसंधान के प्रति नई जिज्ञासा पैदा की है।

चेन्नई स्थित बी.एम. बिरला प्लैनेटोरियम में छात्रों का सामना ब्रह्मांड के अद्भुत दृश्यों से हुआ। यहाँ 360 डिग्री डोम थिएटर में स्काई शो के जरिए उन्हें सौरमंडल, ब्लैक होल और तारों के जीवन चक्र के बारे में विस्तार से समझाया गया। प्लैनेटोरियम की विभिन्न दीर्घाओं में नाभिकीय ऊर्जा और समय क्षेत्रों (Time Zones) की वैज्ञानिक अवधारणाओं को मॉडल्स के जरिए स्पष्ट किया गया। इसके साथ ही छात्रों ने आइंस्टीन, न्यूटन और डॉ. कलाम जैसे महान वैज्ञानिकों के जीवन से प्रेरणा ली। यह यात्रा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

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