प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को समाज निर्माण में निस्वार्थ सेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे एक सशक्त और संवेदनशील राष्ट्र की आधारशिला बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब नागरिक एक-दूसरे की सहायता के लिए प्रेरित होते हैं, तो इससे न केवल समाज समृद्ध होता है बल्कि राष्ट्र की सामूहिक शक्ति में भी वृद्धि होती है। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे सद्भावनापूर्ण कार्यों के जरिए एक-दूसरे के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें।
परोपकार के मानवीय मूल्य को स्पष्ट करने के लिए प्रधानमंत्री ने संस्कृत के एक श्लोक का उद्धरण दिया। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि जिस प्रकार वृक्ष स्वयं कड़ी धूप सहकर दूसरों को शीतलता प्रदान करते हैं और उनके फल भी दूसरों के ही काम आते हैं, ठीक उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति भी अपना जीवन दूसरों की सेवा और सहायता में समर्पित कर देते हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य ही समाज के वास्तविक चरित्र को दर्शाता है।
इससे पूर्व, अपनी चुनावी व्यस्तताओं के बीच प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना स्थित ठाकुरनगर के मतुआ ठाकुर मंदिर की अपनी पुरानी यात्राओं को याद किया। उन्होंने मतुआ समुदाय की दिवंगत आध्यात्मिक गुरु बिनपानी देवी (बोरो मां) के साथ 2019 की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद प्राप्त करना एक अविस्मरणीय अनुभव था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ओराकंडी की यात्रा और मतुआ समुदाय के सदस्यों के साथ बिताए गए पलों ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के क्रियान्वयन का भी उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का उद्देश्य मतुआ जैसे वंचित समुदायों को सम्मानजनक नागरिकता प्रदान करना है। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि पूर्वी बंगाल से आए शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा करना भारत का ऐतिहासिक और नैतिक उत्तरदायित्व है, जिसे सरकार प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है।