मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए 26,800 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को हरी झंडी दी गई। इस बैठक में बुनियादी ढांचे, सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। ‘वंदे मातरम’ के गान के साथ शुरू हुई इस बैठक में लोक निर्माण विभाग (PWD) के लिए अगले पांच वर्षों के वास्ते 26,311 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया।
मंत्रि-परिषद ने पिछड़ा वर्ग के कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए दिल्ली में अध्ययनरत विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि में भारी वृद्धि की है। अब पिछड़ा वर्ग विद्यार्थी छात्रगृह योजना के तहत दी जाने वाली 1,550 रुपये की मासिक सहायता को बढ़ाकर सीधे 10,000 रुपये कर दिया गया है। इस योजना का लाभ प्रतिवर्ष 100 नए विद्यार्थियों (50 स्नातक और 50 स्नातकोत्तर) को मिलेगा। छात्रवृत्ति के लिए पात्रता की शर्त पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के नियमों और निर्धारित आय सीमा के अनुरूप होगी।
बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए लोक निर्माण विभाग को 2026 से 2031 की अवधि हेतु कुल 26,311 करोड़ रुपये की निरंतरता प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत मुख्यालय और संभाग स्तर के कार्यालयों के रखरखाव के लिए 6,180 करोड़ रुपये, केंद्रीय सड़क निधि की परियोजनाओं के लिए 6,925 करोड़ रुपये और जिला मार्गों के नवीनीकरण हेतु 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, भू-अर्जन के मुआवजे के लिए भी 6,500 करोड़ रुपये सुरक्षित रखे गए हैं।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल देने के लिए शाजापुर जिले की लखुंदर सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को 155.82 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इस उच्च दाब प्रणाली से शाजापुर और उज्जैन जिले के कुल 24 गांवों की 9,200 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इस परियोजना में मक्सी के पास स्थित मौजूदा जलाशय के पानी का उपयोग किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए भोपाल के गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में पीजी सीटों की वृद्धि हेतु 79.16 करोड़ रुपये और रीवा के श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल विस्तार के लिए 174.80 करोड़ रुपये की संशोधित स्वीकृतियां दी गई हैं। इसके अतिरिक्त, महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत राज्य की 38,901 आंगनवाड़ियों में बिजली कनेक्शन के लिए 80.41 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे बच्चों को बेहतर वातावरण और आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।