मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के जैव विविधता संरक्षण इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए आज ‘जंगली भैंसा पुनर्स्थापना योजना’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस महत्वपूर्ण अभियान के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए जंगली भैंसों को बालाघाट जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में ‘सॉफ्ट रिलीज’ किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दिन को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि लगभग एक सदी के लंबे अंतराल के बाद प्रदेश की धरती पर जंगली भैंसों की वापसी हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पहल न केवल घास के मैदानों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि पूरे इको-सिस्टम को संतुलित करने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भविष्य में स्थानीय पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
जंगली भैंसों के इस स्थानांतरण ने मध्य प्रदेश और असम के संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। मुख्यमंत्री ने साझा किया कि उनकी हालिया असम यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. हेमंत विस्वा सरमा के साथ जंगली भैंसों और गैंडों के पुनर्वास को लेकर सार्थक बातचीत हुई थी। वर्तमान में कान्हा में छोड़े गए दल में तीन मादा और एक नर जंगली भैंसा शामिल हैं, जो सभी युवा और पूर्णतः स्वस्थ हैं। इनका 2000 किलोमीटर का सफर वरिष्ठ अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में संपन्न हुआ।
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पहले से ही टाइगर, चीता, घड़ियाल और भेड़िया स्टेट के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, और अब यह ‘वल्चर स्टेट’ (गिद्ध राज्य) भी बन गया है। उन्होंने कूनो, गांधी सागर और नौरादेही अभयारण्य में चीतों के पुनर्वास का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर कार्य कर रही है। कार्यक्रम में सांसद श्रीमती भारती पारधी, श्री भगत सिंह नेताम और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।