बुनियादी ढांचे में सुधार और यात्री सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे ने 895.30 करोड़ रुपये की दो बड़ी परियोजनाओं पर मुहर लगा दी है। इन योजनाओं के तहत कोलकाता मेट्रो के विद्युत तंत्र को आधुनिक बनाया जाएगा और दक्षिण पूर्वी रेलवे के अंतर्गत आने वाले एक सदी पुराने पुल का पुनर्निर्माण किया जाएगा। रेल मंत्रालय का यह निर्णय संचालन क्षमता को बढ़ाने और रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
कोलकाता मेट्रो के सबसे पुराने उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने के लिए 671.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके माध्यम से मेट्रो की वर्तमान बिजली वितरण प्रणाली को 11 केवी से उन्नत कर 33 केवी किया जाएगा। साथ ही, बेहतर ऊर्जा प्रबंधन के लिए 7 नए ट्रैक्शन सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस तकनीकी उन्नयन के बाद मेट्रो प्रशासन अधिक फ्रीक्वेंसी के साथ ट्रेनें चला सकेगा, जिससे पीक आवर्स के दौरान यात्रियों की भीड़ को संभालना आसान होगा और ट्रेनों की उपलब्धता दोगुनी हो जाएगी।
मेट्रो के इस कॉरिडोर में सुधार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी क्योंकि 1980 के दशक के पुराने सबस्टेशन अब सेवा देने में सक्षम नहीं रह गए थे। कलपुर्जों की कमी और पुरानी तकनीक के कारण तकनीकी खराबी का डर बना रहता था। इस व्यापक सुधार से न केवल ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी बल्कि कोलकाता वासियों को एक आधुनिक और समयबद्ध मेट्रो सेवा का अनुभव मिलेगा।
वहीं, माल ढुलाई और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रेलवे ने आद्रा डिवीजन में 223.58 करोड़ रुपये की पुल परियोजना को स्वीकृति दी है। मधुकुंडा-दामोदर रेल खंड पर स्थित पुल संख्या 520, जिसका एक हिस्सा 120 साल से भी अधिक पुराना है, अब पूरी तरह बदला जाएगा। यह पुल कोयला परिवहन के लिए एक जीवनरेखा की तरह है और आसनसोल-टाटानगर जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों को जोड़ता है।
इस बुनियादी ढांचे के विकास से दुर्गापुर-आसनसोल बेल्ट में स्थित इस्पात और कोयला उद्योगों को सीधा लाभ होगा। नए और मजबूत पुल के निर्माण से भारी मालगाड़ियों का आवागमन सुगम और सुरक्षित हो जाएगा। कुल मिलाकर, ये दोनों परियोजनाएं भारतीय रेलवे के उस विजन को दर्शाती हैं जहाँ तकनीक और सुरक्षा के मेल से एक उच्च क्षमता वाले रेल नेटवर्क का निर्माण किया जा रहा है।