पीएम मोदी के काशी दौरे से ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को मिली वैश्विक स्तर पर नई पहचान

पीएम मोदी के काशी दौरे से ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को मिली वैश्विक स्तर पर नई पहचान

वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया उपस्थिति ने ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को विश्व पटल पर चर्चा का केंद्र बना दिया है। गत 29 अप्रैल को बाबा विश्वनाथ के दर्शन के पश्चात प्रधानमंत्री ने इस विशेष घड़ी का अवलोकन किया था। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के इस अनूठे मेल की सराहना की, जिसके बाद डिजिटल माध्यमों पर इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, टेलीविजन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगभग 78 लाख से अधिक लोगों ने इस घड़ी के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शनिवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ‘विक्रमोत्सव वाराणसी’ हैशटैग शीर्ष पर ट्रेंड करता रहा। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल जगत में मिली यह व्यापक प्रतिक्रिया देश की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और उनकी आधुनिक प्रासंगिकता के प्रति आम जनता की बढ़ती रुचि का प्रमाण है। इस घड़ी को उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य अनुसंधान संस्थान ने तैयार किया है, जिसे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट स्वरूप दिया था। इसे 4 अप्रैल को मंदिर परिसर में स्थापित किया गया था।

मध्य प्रदेश शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की प्राचीन काल-गणना पद्धति की वैज्ञानिक व्याख्या करती है। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खगोलीय ज्ञान को समकालीन तकनीक के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। यह घड़ी आम घड़ियों से भिन्न है, क्योंकि यह सूर्योदय पर आधारित 30 घंटे के चक्र पर चलती है और समय को 30 विशिष्ट मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसके माध्यम से नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति सहित पंचांग के सभी महत्वपूर्ण तत्वों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

इस तकनीक को और अधिक सुलभ बनाने के लिए ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया गया है। 189 भाषाओं में उपलब्ध यह ऐप उपयोगकर्ताओं को सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त और महाभारत काल से लेकर अब तक के करीब 7,000 वर्षों का पंचांग विवरण उपलब्ध कराता है। भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि वाराणसी की सफलता के बाद अब अयोध्या के राम मंदिर और देश के अन्य प्रमुख ज्योतिर्लिंगों पर भी ऐसी ही वैदिक घड़ियां स्थापित करने की तैयारी है, ताकि भारत की समृद्ध विरासत और आधुनिक तकनीक के इस संगम को व्यापक विस्तार मिल सके।

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