रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक वर्ष पूरे होने पर भारतीय सेना के साहस और सामरिक कौशल की सराहना की। भारतीय सेना के ‘नॉर्थ टेक सिम्पोजियम’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान ने न केवल आतंकवादियों और उनके मददगारों को मुंहतोड़ जवाब दिया, बल्कि पूरे विश्व में भारत की सैन्य क्षमताओं का लोहा भी मनवाया। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में सेना को केवल सक्रिय (एक्टिव) रहने से काम नहीं चलेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के प्रति ‘प्रोएक्टिव’ दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।
रक्षामंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को आधुनिक युद्ध कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि इसमें ‘आकाश तीर’, आकाश मिसाइल सिस्टम और ‘ब्रह्मोस’ जैसी उन्नत प्रणालियों का प्रभावी उपयोग किया गया। उन्होंने इसे तकनीक और सेना के आत्मविश्वास का प्रतीक बताया। उनके अनुसार, पहले युद्ध में शत्रु की रणनीति और हथियारों का अनुमान लगाना सरल था, लेकिन अब नागरिक जीवन की सामान्य वस्तुएं भी घातक हथियारों में तब्दील हो रही हैं, जिससे युद्ध की प्रकृति पूरी तरह बदल गई है।
देश की रक्षा आत्मनिर्भरता पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को छू चुका है, जिसमें निजी क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। सरकार ने रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) बजट का 25% हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षा जगत के लिए सुरक्षित किया है, जिसमें से अब तक 4,500 करोड़ रुपये का उपयोग किया जा चुका है।
रक्षा मंत्री ने उद्योग जगत से ‘नॉलेज कॉरिडोर’ विकसित करने का आह्वान किया ताकि आपसी सहयोग से तकनीक को और साझा किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धों की दिशा आज प्रयोगशालाओं (लैब्स) में तय हो रही है। डीआरडीओ अब उद्योगों के साथ मिलकर रिसर्च को अगले स्तर पर ले जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भी भविष्य में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।