पश्चिम बंगाल में हुए हालिया विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत और 15 वर्षों से चले आ रहे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के शासन के अंत के बाद, राज्य में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनावी रैलियों के दौरान किए गए वादों के अनुरूप, अब आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी प्रमुख योजनाओं को राज्य में पूरी तरह लागू किए जाने की तैयारी है। पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार और केंद्र के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण ये योजनाएं अब तक राज्य में लंबित या आंशिक रूप से ही प्रभावी थीं।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव स्वास्थ्य क्षेत्र में देखने को मिलेगा। अब तक राज्य की अपनी ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना के कारण राष्ट्रीय स्तर की ‘आयुष्मान भारत’ योजना को बंगाल में अनुमति नहीं दी गई थी। जहाँ ‘स्वास्थ्य साथी’ का लाभ केवल राज्य तक सीमित था, वहीं आयुष्मान भारत के लागू होने से बंगाल के निवासियों को देश भर के अस्पतालों में उपचार की सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही, जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुँचाने के कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य को आवंटित 24,645 करोड़ रुपये में से केवल 53 प्रतिशत का ही उपयोग हो पाया था, जिसका मुख्य कारण प्रशासनिक देरी और दस्तावेजी औपचारिकताएं थीं।
आवास और शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की संभावना है। प्रधानमंत्री आवास योजना, जो अब तक ‘बांग्लार बाड़ी’ के समांतर चल रही थी, अब अधिक व्यापक रूप से लागू होगी। इसी तरह, शिक्षा के क्षेत्र में ‘पीएम श्री’ योजना को ‘कन्याश्री’ के साथ जोड़कर या स्वतंत्र रूप से लागू कर छात्राओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता में वृद्धि की जा सकती है। मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ से मछुआरों को आधुनिक उपकरण और बीमा कवर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
आर्थिक सहायता के मोर्चे पर, केंद्र सरकार की ‘युवा शक्ति भरोसा’ और ‘मातृशक्ति भरोसा’ योजनाओं से लाभार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। जहाँ राज्य की ‘युवाश्री’ और ‘लक्ष्मी भंडार’ योजनाओं के तहत क्रमशः 1,500 रुपये दिए जा रहे थे, वहीं केंद्र की योजनाओं के लागू होने पर बेरोजगार युवाओं और पात्र महिलाओं को 3,000 रुपये प्रति माह की राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होगी। 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर सत्ता में आई भाजपा सरकार के लिए इन योजनाओं का सफल क्रियान्वयन एक बड़ी प्राथमिकता होगी।