भारतीय सेवा क्षेत्र में जबरदस्त उछाल: अप्रैल में पीएमआई 58.8 के साथ पांच महीने के शिखर पर

भारतीय सेवा क्षेत्र में जबरदस्त उछाल: अप्रैल में पीएमआई 58.8 के साथ पांच महीने के शिखर पर

बुधवार को जारी एचएसबीसी इंडिया के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र ने अप्रैल माह में शानदार प्रदर्शन किया है। सर्विसेज पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मार्च के 57.5 से बढ़कर अप्रैल में 58.8 पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। नवंबर 2025 के बाद यह इस क्षेत्र की सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के सेवा क्षेत्र में जारी मजबूती और विस्तार के रुख को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

सर्वेक्षण के परिणामों से पता चलता है कि नए कारोबारी ऑर्डर में पिछले पांच महीनों की तुलना में सबसे तेज गति से वृद्धि देखी गई है। इस सकारात्मक बदलाव के पीछे प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण, ई-कॉमर्स की बढ़ती पैठ और लॉजिस्टिक्स व रीलोकेशन सेवाओं की मजबूत मांग जैसे प्रमुख कारक रहे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण नए निर्यात ऑर्डरों में कुछ गिरावट दर्ज की गई, लेकिन घरेलू बाजार की मजबूत मांग ने इसकी भरपाई कर दी। एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मांग का केंद्र विदेशी बाजारों से हटकर अब घरेलू उपभोक्ताओं की ओर स्थानांतरित हो रहा है।

लागत और मुनाफे के मोर्चे पर, इनपुट लागत की मुद्रास्फीति में मार्च की तुलना में मामूली कमी आई है। दिलचस्प बात यह है कि कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला, जिसके कारण आउटपुट प्राइस इन्फ्लेशन नियंत्रित रहा। आगामी वर्ष को लेकर सेवा प्रदाता कंपनियां काफी उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रभावी मार्केटिंग और ग्राहकों की बढ़ती पूछताछ से कारोबार और बढ़ेगा, हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और भविष्य की लागत को लेकर थोड़ी चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं।

रोजगार के मोर्चे पर भी सुखद संकेत मिले हैं। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों ने जूनियर स्तर और अल्पकालिक कर्मचारियों की भर्ती में तेजी दिखाई है। सेवा क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र की समग्र गतिविधियों में भी सुधार हुआ है, जिससे कंपोजिट पीएमआई इंडेक्स 57 से बढ़कर 58.2 हो गया है। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई भी अप्रैल में 54.7 दर्ज किया गया, जो मार्च के 53.9 से अधिक है। उत्पादन, रोजगार और नए ऑर्डरों में हुई इस वृद्धि ने भारत की आर्थिक रफ्तार को और मजबूती प्रदान की है।

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