अटलांटिक महासागर की यात्रा पर निकले एक क्रूज शिप ‘एमवी होंडियस’ पर चूहों से फैलने वाले घातक हंतावायरस संक्रमण ने हड़कंप मचा दिया है। इस संक्रमण की चपेट में आने से अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को इस दुखद घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि की है। संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से जहाज को वर्तमान में अफ्रीकी देश केप वर्डे की राजधानी प्राया में ही रोक दिया गया है और किसी भी यात्री को तट पर उतरने की अनुमति नहीं दी गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, जहाज पर सवार कुल छह व्यक्तियों में संक्रमण जैसे संदिग्ध लक्षण देखे गए हैं, जिनमें से एक मामले की पुष्टि प्रयोगशाला जांच में हो चुकी है। बीमारों में से एक मरीज की हालत चिंताजनक है और वह दक्षिण अफ्रीका के एक अस्पताल में आईसीयू में उपचाराधीन है। वहीं, दो अन्य प्रभावित मरीजों को उपचार हेतु जहाज से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि सभी बीमार व्यक्ति हंतावायरस से ही ग्रसित हैं या नहीं; संक्रमण के मूल स्रोत का पता लगाने के लिए गहन जांच जारी है।
नीदरलैंड के ध्वज तले संचालित होने वाला यह क्रूज शिप पिछले सात हफ्तों से समुद्र में है। इसकी यात्रा 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से शुरू हुई थी, जिसके बाद इसने अंटार्कटिका (दक्षिणी ध्रुव) के क्षेत्रों का भ्रमण किया। अटलांटिक पार करते हुए इसे स्पेन के कैनरी द्वीप तक पहुंचना था। जहाज पर इस समय 170 पर्यटक और 71 चालक दल के सदस्य सवार हैं। मौतों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब एक 70 वर्षीय यात्री ने जहाज पर ही दम तोड़ दिया। इसके बाद उनकी पत्नी की भी दक्षिण अफ्रीका के हवाई अड्डे पर तबीयत बिगड़ने से अस्पताल में मृत्यु हो गई। क्रूज कंपनी ‘ओशनवाइड एक्सपेडिशंस’ ने सूचित किया है कि तीसरे मृतक का पार्थिव शरीर अभी भी केप वर्डे में जहाज पर ही रखा गया है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी पहेली यह है कि वायरस जहाज तक कैसे पहुंचा। अर्जेंटीना का वह क्षेत्र जहाँ से यात्रा शुरू हुई थी, वहां हंतावायरस का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के मुताबिक, हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों के मलमूत्र या लार के संपर्क में आने से इंसानों में फैलता है। इस वायरस के कारण इंसानों में ‘पल्मोनरी सिंड्रोम’ जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो जाती है। पहली बार 1993 में अमेरिका में पहचाने गए इस वायरस ने तब सैकड़ों लोगों की जान ली थी। फिलहाल, जहाज के भीतर स्वच्छता मानकों और चूहों की मौजूदगी की जांच की जा रही है।