कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की। सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से भाजपा विधानमंडल दल का नेता चुना गया है। वे कल यानी शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो सुवेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे खास सिपहसालार माने जाते थे। नंदीग्राम और सिंगूर के आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता के शिखर तक पहुँचाया था। हालांकि, समय के साथ वैचारिक मतभेदों के कारण 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। तब से वे ममता बनर्जी के सबसे मुखर प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं।
सुवेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि नंदीग्राम और भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ मिली जीत मानी जा रही है। 2021 में उन्होंने नंदीग्राम में मुख्यमंत्री को सीधे मुकाबले में हराया था। हालिया चुनावों में उन्होंने न केवल नंदीग्राम बल्कि ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट भवानीपुर से भी भारी मतों से विजय प्राप्त की, जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया।
पूर्वी मेदिनीपुर क्षेत्र में अधिकारी परिवार का गहरा प्रभाव है। छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले सुवेंदु 1989 में पहली बार छात्र परिषद के प्रतिनिधि बने थे। वे 2006 में पहली बार विधायक और उसके बाद 2009 एवं 2014 में तमलुक सीट से सांसद निर्वाचित हुए। ममता सरकार में उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले थे, लेकिन 2007 का नंदीग्राम आंदोलन उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
शिशिर अधिकारी के पुत्र सुवेंदु एक ऐसे राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं जिसका जमीन पर मजबूत संगठन है। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनके चयन को भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें एक जमीनी और अनुभवी नेतृत्व के जरिए बंगाल में प्रशासन को नई दिशा देने की योजना है।