पश्चिम एशिया में गहराते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि भारत के पास वर्तमान में 60 दिनों की आवश्यकता के बराबर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का स्टॉक उपलब्ध है, जबकि एलपीजी का भंडार 45 दिनों के लिए पर्याप्त है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्री समूह की बैठक में देश की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा की समीक्षा की गई। सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराकर पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं, क्योंकि पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 और 11 मई को लगातार दो दिन देशवासियों से संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का आग्रह किया। उन्होंने जनता से निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल पर जोर देने को कहा। वडोदरा में एक संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि जिस तरह देश ने एकजुट होकर कोरोना महामारी का मुकाबला किया था, उसी तरह इस संकट से भी सफलतापूर्वक बाहर निकल आएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिए कि ईंधन संरक्षण की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू होनी चाहिए। उन्होंने सभी विभागों और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने को कहा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए भारत कई अन्य देशों से ऊर्जा खरीद के विकल्प तलाश रहा है। वर्तमान में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $703 अरब के साथ मजबूत स्थिति में है, जो आर्थिक स्थिरता का संकेत है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब ₹1000 करोड़ का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस घाटे को कम करने के लिए विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि 15 मई के आसपास पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹4 से ₹5 प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडर के दाम में ₹50 तक की वृद्धि की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, सरकार गैर-जरूरी वस्तुओं जैसे सोना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आयात पर नियंत्रण लगाने पर भी विचार कर रही है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
भारत की उपभोग क्षमता की बात करें तो देश में प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार 90 दिनों का भंडार आदर्श माना जाता है, हालांकि भारत का 60 से 74 दिनों का बैकअप भी सुरक्षित श्रेणी में आता है। वर्तमान में विशाखापत्तनम, मंगलूरु और पादुर के रणनीतिक भूमिगत भंडारों में उनकी क्षमता का 64% हिस्सा भरा हुआ है, जो आपातकालीन स्थिति में महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करता है।