प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने आगामी विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में उल्लेखनीय वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के हित संरक्षण की दिशा में उठाए गए इन ठोस कदमों का सीधा फायदा मध्य प्रदेश के कृषि परिदृश्य को मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस नीतिगत निर्णय से न केवल किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलेगा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में भी सहायक होगा। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में चल रहे ‘किसान कल्याण वर्ष’ के अभियानों के साथ एमएसपी की यह वृद्धि एक सकारात्मक समन्वय स्थापित करेगी। राज्य सरकार पहले से ही किसानों को आधुनिक यंत्र और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है, जिससे उत्पादन और लाभ दोनों में वृद्धि संभव है।
खरीफ फसलों के नए मूल्यों के अनुसार, तिलहन और अनाज दोनों श्रेणियों में विशेष ध्यान दिया गया है। सूरजमुखी के बीज में प्रति क्विंटल 622 रुपये की सबसे बड़ी वृद्धि की गई है। साथ ही मध्यम रेशे वाले कपास और अन्य तिलहनों जैसे मूंगफली व सोयाबीन में भी किसानों को उनकी लागत पर 50 प्रतिशत का मार्जिन मिलना तय किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना दाम दिलाने के सरकार के संकल्प को दोहराती है।
फसलवार लाभ के विश्लेषण पर गौर करें तो मूंग उत्पादक किसानों को उनकी लागत पर सर्वाधिक 61 प्रतिशत का मुनाफा होने का अनुमान लगाया गया है। इसी क्रम में बाजरा और मक्का पर 56 प्रतिशत तथा अरहर पर 54 प्रतिशत लाभ रहने की संभावना है। धान, रागी और हाइब्रिड ज्वार जैसी प्रमुख फसलों पर भी किसानों को लागत के ऊपर 50 प्रतिशत का सुनिश्चित लाभ प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने अंत में जोर दिया कि मध्य प्रदेश ‘श्री अन्न’ के उत्पादन में देश का केंद्र बन रहा है। केंद्र सरकार के इस फैसले से विशेष रूप से प्रदेश के उन आदिवासी और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो ज्वार, बाजरा और रागी जैसे पोषक अनाजों की खेती करते हैं। यह कदम देश की खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा।