भोपाल के बरखेड़ा पठानी स्थित लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र में आयोजित ‘वनधन संवाद’ कार्यशाला में मध्य प्रदेश के शहद को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई। इस विशेष सत्र में न्यूजीलैंड से आए विषय विशेषज्ञों ने स्थानीय वन समितियों और वनधन केंद्रों के प्रतिनिधियों को शहद संग्रहण, उन्नत प्रसंस्करण और प्रभावी विपणन की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से शहद की गुणवत्ता सुधारना और वैश्विक बाजार में प्रदेश की उपस्थिति दर्ज कराना है।
कार्यशाला के दौरान न्यूजीलैंड के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ईशान जयवर्धने, बायरन पीटर टेलर और प्रियम अरोरा ने शहद उत्पादन की उत्कृष्ट वैश्विक पद्धतियों पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन, गुणवत्ता नियंत्रण और बेहतर पैकेजिंग के जरिए किस प्रकार स्थानीय शहद अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर सकता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए आधुनिक प्रबंधन तकनीकों को शहद के व्यापार को विस्तार देने का आधार बताया।
मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक श्रीमती कमलिका मोहंता ने इस अवसर पर वन समितियों के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उत्पादित शहद के ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और इसके निर्यात को बढ़ावा देना वर्तमान समय की आवश्यकता है। श्रीमती मोहंता के अनुसार, न्यूजीलैंड के विशेषज्ञों के तकनीकी इनपुट से राज्य के वनधन केंद्रों को नई दिशा प्राप्त होगी और वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकेंगे।
न्यूजीलैंड से आए दल ने एमएफपी (MFP) पार्क की अत्याधुनिक प्रयोगशाला और शहद प्रसंस्करण इकाई का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मौजूद व्यवस्थाओं और गुणवत्ता मानकों का बारीकी से अवलोकन किया। इस संवाद कार्यक्रम में ट्रायफेड, एपीडा और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए वन विभाग के अधिकारी और वनधन केंद्रों के सदस्य भी शामिल हुए।