प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपनी नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद प्रवासी भारतीयों ने बेहद गर्मजोशी और उत्साह के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और नीदरलैंड्स के द्विपक्षीय व कूटनीतिक रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने में प्रवासी समुदाय के अभूतपूर्व योगदान को रेखांकित किया।
इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि प्रवासी भारतीयों के साथ यह मुलाकात एक विशाल परिवार से मिलने जैसी रही। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी डच-भारतीय समुदाय के स्नेह और ऊर्जा से बेहद अभिभूत नजर आए। प्रधानमंत्री ने वहां रह रहे भारतीयों को दोनों देशों के बीच का एक मजबूत कूटनीतिक सेतु बताया और कहा कि वे आपसी संबंधों को नई दिशा देने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर सूरीनामी-हिंदुस्तानी समुदाय का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने भारत के साथ इस समुदाय के सदियों पुराने अटूट ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को याद किया। पीएम मोदी ने इस बात की भी सराहना की कि इस समुदाय ने अपनी पीढ़ियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध परंपराओं को न सिर्फ सहेज कर रखा है, बल्कि वे इसे गर्व के साथ मनाते भी हैं।
अपने संबोधन के दौरान भारत के आंतरिक विकास और आर्थिक प्रगति की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवाओं में स्टार्टअप्स को लेकर एक नया मिजाज और गजब का उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि करीब 12 वर्ष पहले भारत में 500 से भी कम स्टार्टअप मौजूद थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर दो लाख को पार कर चुकी है। साल 2014 तक देश में महज 4 यूनिकॉर्न कंपनियां थीं, जो अब बढ़कर लगभग सवा सौ हो चुकी हैं। केवल साल 2025 में ही देश के भीतर तकरीबन 44 हजार नए स्टार्टअप पंजीकृत किए गए हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), अंतरिक्ष और रक्षा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में शोध (रिसर्च) और नवाचार की संस्कृति लगातार व्यापक रूप ले रही है, जिसका परिणाम है कि पिछले वर्ष देश में लाखों से अधिक पेटेंट दर्ज कराए गए। इसके साथ ही भारत अब सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहा है। मौजूदा समय में देश के भीतर 12 सेमीकंडक्टर संयंत्रों पर काम चल रहा है, जिनमें से दो फैक्ट्रियों में उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में देश के भीतर ही चिप की डिजाइनिंग और मैनुफैक्चरिंग मुमकिन होगी।
वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाने का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश आज एक बड़ी ‘इन्नोवेशन पावर’ बनकर उभरा है। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता की गूंज आज समूचे विश्व में है, जो देशवासियों की तकनीकी समझ का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने बताया कि आज देश में वित्तीय प्रबंधन के लिए डिजिटल वॉलेट, दस्तावेजों के लिए डिजिलॉकर, विमान यात्रा के लिए डिजियात्रा और चिकित्सा सुविधाओं के लिए डिजिटल हेल्थ आईडी जैसी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से काम कर रही हैं। वर्तमान में भारत में हर महीने 20 बिलियन (2000 करोड़) से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन दर्ज किए जा रहे हैं, जो यह साबित करता है कि दुनिया के कुल डिजिटल भुगतानों का आधे से अधिक हिस्सा अकेले भारत में निष्पादित हो रहा है।