मध्य प्रदेश वर्तमान में अपनी उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल वातावरण की बदौलत उन्नत बागवानी के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रदेश में उत्पादित होने वाले केसर, आम्रपाली और तोतापरी जैसे आमों की श्रृंखला में आलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा अंचल का ‘नूरजहाँ’ आम अपनी दुर्लभता और अद्वितीय स्वरूप के कारण देश-विदेश में कौतूहल का विषय बना हुआ है। दुनिया के सबसे विशालकाय आमों में शुमार इस किस्म को इसकी विशिष्टताओं की वजह से फलों का राजा भी कहा जाता है।
इस आम की सबसे बड़ी विशेषता इसका भारी-भरकम वजन है, जो प्रति फल 2 से 5 किलो तक होता है। अपने बड़े आकार, मनमोहक महक और उच्च मिठास के चलते यह उपभोक्ताओं को पहली नजर में प्रभावित करता है। विशिष्ट और सीमित श्रेणी का फल होने के कारण बाजार में इसकी कीमत ₹1500 से ₹3000 प्रति आम तक लगाई जाती है। इसके वृक्षों पर फल बहुत ही सीमित मात्रा में आते हैं, जिसके चलते यह आम उत्पादकों के लिए एक अत्यंत प्रीमियम और उच्च मुनाफे वाली फसल साबित हो रहा है। कट्ठीवाड़ा की विशेष जलवायु इसकी गुणवत्ता को और अधिक निखार देती है।
इसकी उत्पत्ति और प्रसार के इतिहास को देखें तो यह प्रजाति सुदूर अतीत में अफगान क्षेत्र से भारतीय उपमहाद्वीप में प्रविष्ट हुई थी। इसके बाद वर्ष 1950 और 1960 के दशकों में यह मालवा तथा झाबुआ के जनजातीय क्षेत्रों में स्थापित हुई। ग्राम जूना कट्टीवाड़ा के शिव (बावड़ी) आम फार्म के संचालक कृषक भरतराजसिंह जादव ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव करीब 55-60 साल पहले गुजरात के बनमाह इलाके से यह पौधा लाए थे। उनकी दीर्घकालिक मेहनत के कारण यह पौधा संरक्षित हो सका। उनके पिता द्वारा ग्राफ्टिंग तकनीक से विकसित किए गए मुख्य पेड़ की उम्र अभी 20 से 25 वर्ष है, जबकि भरतराजसिंह द्वारा तैयार किए गए 11 अन्य कलमी पौधे वर्तमान में 3 से 5 वर्ष की आयु के हो चुके हैं।
ऐतिहासिक दावों के मुताबिक, मुगलकाल में इस तरह की बड़ी और जायकेदार किस्मों को शाही बागानों की शोभा बढ़ाने के लिए संरक्षित किया जाता था। यही विरासत बाद में पश्चिमी भारत के झाबुआ और आलीराजपुर के सीमावर्ती हिस्सों तक पहुंची, जहाँ स्थानीय किसानों ने इसे पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा। इस बेजोड़ वानस्पतिक विशेषता के लिए नूरजहाँ आम को वर्ष 1999 और वर्ष 2010 में राष्ट्रीय स्तर के सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है, जिसने आलीराजपुर जिले को देश के मानचित्र पर गौरवशाली स्थान दिलाया।
यद्यपि सीमित मात्रा में उत्पादन होने के कारण इस आम का भारी तादाद में लदान या एक्सपोर्ट नहीं किया जाता, फिर भी वैश्विक स्तर पर इसे एक अति-विशिष्ट फल का दर्जा प्राप्त है। संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे मध्य-पूर्व के देशों के साथ-साथ अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, सिंगापुर और मलेशिया में भी इसकी जबरदस्त लोकप्रियता है। इस बीच, प्रादेशिक प्रशासन और उद्यानिकी विभाग की ओर से फल प्रसंस्करण, आधुनिक ड्रिप इरिगेशन और परिष्कृत पौधों के वितरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जो क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त करने और राज्य को कृषि क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।