चिकित्सा क्षेत्र को सेवा का माध्यम बनाएं, व्यावसायिकता के साथ समाज परिवर्तन भी जरूरी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

चिकित्सा क्षेत्र को सेवा का माध्यम बनाएं, व्यावसायिकता के साथ समाज परिवर्तन भी जरूरी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधारों को लेकर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि मरीजों का इलाज करना महज एक पेशा या व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से मानव सेवा का सबसे बड़ा जरिया है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य देश और प्रदेश में ऐसे डॉक्टरों को तैयार करना है, जो मरीजों के उपचार और लोक-कल्याण के कार्यों के लिए हमेशा तत्पर रहें। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल की गरिमामयी मौजूदगी में मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और महाराष्ट्र की सामाजिक संस्था ‘सेवांकुर भारत’ (डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान, छत्रपति संभाजी नगर) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

आगामी पांच वर्षों के लिए किए गए इस समझौते का मुख्य ध्येय मध्यप्रदेश को सेवा-उन्मुख स्वास्थ्य नेतृत्व के मामले में देश का एक आदर्श राज्य बनाना है। इस साझेदारी के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य डॉक्टरों की एक ऐसी नई पीढ़ी का निर्माण करना है, जो केवल अपने पेशेवर दायित्वों तक सीमित न रहकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के वाहक की भूमिका भी निभाएं। यह पूरा प्रोजेक्ट व्यावहारिक और अनुभव पर आधारित शिक्षा के साथ-साथ मूल्यों से जुड़े नेतृत्व विकास के सिद्धांतों पर काम करेगा, जिसे ‘सेवा के जरिए सीखना’ नाम दिया गया है। इसके अंतर्गत “एक सप्ताह देश के नाम” नामक एक विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें करीब 300 चयनित प्रतिभागियों को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में बेहद कड़ा और गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस मुख्य प्रशिक्षण सत्र के पूरा होने के बाद भी प्रतिभागियों की निरंतर सहभागिता बनाए रखने के लिए व्यक्तित्व विकास शिविर और अनुभव साझा करने के सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। इस मौके पर अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल सहित सेवांकुर भारत प्रकल्प के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

इस समझौते का मुख्य स्तंभ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान है, जिसकी नींव साल 1989 में समाज के प्रति पूरी तरह समर्पित डॉक्टरों के एक समूह द्वारा रखी गई थी। पिछले 30 सालों से अधिक के सफर में इस गौरवशाली संस्थान ने देश के 70 लाख से भी ज्यादा गरीब, वंचित और जरूरतमंद मरीजों को बेहद कम खर्च में उच्च गुणवत्ता वाली और संवेदनशील चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। इस पूरी संस्था की मुख्य कार्यस्थली छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद) का सुप्रसिद्ध ‘डॉ. हेडगेवार रुग्णालय’ है, जो अपनी सादगी, सेवा के प्रति अटूट निष्ठा और उच्च व्यावसायिक मानकों के कारण आम जनता तक बेहतरीन इलाज पहुंचाने के लिए जाना जाता है।

मौजूदा समय में यह प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान भारत के अलग-अलग हिस्सों में 46 समेकित विकास परियोजनाओं का कुशलतापूर्वक संचालन कर रहा है। इनमें नासिक, संभाजीनगर और असम के शिवसागर में स्थित मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल, नर्सिंग व फिजियोथेरेपी से जुड़े कॉलेज और एशिया की सबसे उन्नत व आधुनिक ब्लड बैंक (रक्तपेढी) शामिल हैं। इसके अलावा यह संस्थान ग्रामीण इलाकों और झुग्गी-बस्तियों में स्वास्थ्य सेवाएं देने के साथ-साथ ओपन हार्ट सर्जरी, नवजात शिशु गहन चिकित्सा, आईवीएफ, एमआरआई और कैथ लैब जैसी विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान कर रहा है। साथ ही महिला एवं बाल विकास, व्यापक टीकाकरण अभियानों और सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकारों में भी इस संस्था की सक्रिय भागीदारी बनी हुई है।

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