भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने नॉर्वेजियन समकक्ष के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों देशों के बीच संबंधों के नए दौर का ऐलान किया। नॉर्वे दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों ने ‘ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, ब्लू इकॉनमी, ग्रीन शिपिंग और डिजिटल जैसे अहम क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर साझा काम किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे में मिले आत्मीय स्वागत के लिए आभार प्रकट करते हुए वहां के नागरिकों को उनके ‘संविधान दिवस’ की बधाई दी। उन्होंने नॉर्वे को प्रकृति और मानव प्रगति के बीच संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण बताया। साथ ही, उन्होंने पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसके चलते उन्हें अपनी नॉर्वे यात्रा टालनी पड़ी थी। पीएम ने संकट की उस घड़ी में आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए नॉर्वे की सराहना की और इसे सच्ची मित्रता करार दिया।
मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत और यूरोप के संबंधों को एक ‘स्वर्णिम युग’ बताते हुए पीएम मोदी ने आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू हुआ ‘ट्रेड एंड इकनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ (TEPA) दोनों देशों की प्रगति का नया आधार बनेगा। इस ऐतिहासिक समझौते के माध्यम से आगामी 15 सालों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और करीब 10 लाख नए रोजगार पैदा होने का लक्ष्य रखा गया है। भारत की प्रतिभा व गति और नॉर्वे की पूंजी व तकनीक के तालमेल से पर्यावरण अनुकूल वैश्विक समाधान विकसित किए जाएंगे।
अंतरिक्ष, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने अपने कदम आगे बढ़ाए हैं। प्रधानमंत्री ने आर्कटिक क्षेत्र में नॉर्वे की भूमिका को अहम बताते हुए भारत के अनुसंधान केंद्र ‘हिमाद्रि’ के सुचारू संचालन में मिल रहे सहयोग के लिए नॉर्वे का धन्यवाद किया। इसके साथ ही, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और नॉर्वे की स्पेस एजेंसी के बीच हुए नए समझौते (MoU) को अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक बड़ी छलांग बताया। एआई, साइबर सुरक्षा, जियोलॉजी और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी साझा रिसर्च पर सहमति बनी है, ताकि भविष्य की जरूरतों के लिए तकनीक और कौशल का सही इस्तेमाल हो सके।
वैश्विक कूटनीति का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने नॉर्वे के ‘इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव’ में शामिल होने पर प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने ‘ट्रायंगुलर डेवलपमेंट कोऑपरेशन एग्रीमेंट’ की भी जानकारी दी, जिससे ग्लोबल साउथ के देशों में भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए मानव विकास को बढ़ावा मिलेगा। अंत में, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी समस्या का हल सैन्य युद्ध नहीं हो सकता। दोनों देशों ने वैश्विक शांति, कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और आतंकवाद के पूर्ण खात्मे पर एक सुर में जोर दिया।