निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला: 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों और दो उपचुनावों के लिए 18 जून को मतदान

निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला: 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों और दो उपचुनावों के लिए 18 जून को मतदान

देश के शीर्ष विधायी सदन में खाली हो रहे स्थानों को भरने के लिए केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु की दो सीटों पर उपचुनावों के साथ-साथ 10 राज्यों की 24 सीटों पर द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव कराने की घोषणा की है। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी निर्वाचन क्षेत्रों में आगामी 18 जून को एक साथ वोटिंग कराई जाएगी और इसी दिन शाम तक मतों की गिनती कर चुनावी नतीजों को सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

महाराष्ट्र और तमिलनाडु के राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण खाली हुई इन दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनावों पर सभी की नजरें टिकी हैं। महाराष्ट्र की सीट सुनेत्रा पवार के पाला बदलने यानी विधायक निर्वाचित होने के बाद 6 मई को दिए गए इस्तीफे से खाली हुई थी, जिनका कार्यकाल जुलाई 2028 तक बचा हुआ था। इसी तरह तमिलनाडु में एआईएडीएमके के सीवी शनमुगम ने मैलाम सीट से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद 7 मई को संसद के उच्च सदन से त्यागपत्र दे दिया था। शनमुगम का कार्यकाल भी जून 2028 के आखिर में समाप्त होना था।

पैनल द्वारा जारी आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की औपचारिक शुरुआत 1 जून को गजट अधिसूचना जारी होने के साथ हो जाएगी। इसके बाद प्रत्याशियों के पास अपनी उम्मीदवारी पेश करने के लिए 8 जून तक का समय होगा, जिसे नामांकन की आखिरी समय-सीमा घोषित किया गया है। यह पूरी कवायद जून और जुलाई के बीच अपनी अवधि पूरी कर रहे दो दर्जन सांसदों की जगह नए चेहरों को सदन में भेजने के लिए की जा रही है।

सीटों के गणित की बात करें तो दक्षिण और पश्चिम भारत के प्रमुख राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात की चार-चार सीटों पर नए सांसदों का चयन होगा। मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम से मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटों पर चुनावी मुकाबला तय हुआ है। इसके साथ ही झारखंड की दो सीटों और सुदूर पूर्वोत्तर के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और मेघालय की एक-एक रिक्त हो रही सीट पर भी प्रतिनिधि चुने जाएंगे।

निर्वाचन आयोग ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि मतदान प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था और शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आयोग ने जमीनी स्तर पर चुनावी गतिविधियों की निगरानी के लिए विशेष रूप से कुशल पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करने की बात कही है, जो पारदर्शी और निर्बाध मतदान सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच करेंगे।

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