अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के संदर्भ में एक नया और बेहद कड़ा संदेश जारी किया है, जिसमें चेतावनी के साथ-साथ कूटनीतिक समाधान का विकल्प भी खुला रखा गया है। अमेरिकी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि तेहरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सामरिक तनाव चरम पर है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहरी हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता का दौर जारी है। भारत दौरे पर रवाना होने से पहले मियामी के होमस्टेड एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर किसी भी तरह का टैक्स या टोल लगाने का प्रयास किया, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विदेश मंत्री रुबियो ने रणनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में किसी भी प्रकार की टोल व्यवस्था को अमेरिका कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने जानकारी दी कि वाशिंगटन इस समय बहरीन द्वारा प्रायोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन कर रहा है, जो ईरान के ऐसे किसी भी संभावित कदम का विरोध करता है। रुबियो के अनुसार, इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद के इतिहास में अब तक का सबसे व्यापक समर्थन मिला है, जिसमें 100 से अधिक देश सह-प्रायोजक के रूप में साथ आए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक स्तर पर कोई भी देश इस जलमार्ग पर टैक्स वसूलने के पक्ष में नहीं है और यदि ईरान इस अनुचित दिशा में आगे बढ़ता है, तो किसी भी प्रकार के कूटनीतिक समझौते की संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी।
इसी बीच, व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना की मजबूत उपस्थिति के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर वर्तमान में अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण स्थापित है। ट्रंप ने इस सुरक्षा चक्र की तुलना एक ‘स्टील की दीवार’ से करते हुए कहा कि अमेरिकी अनुमति के बिना वहां से कोई भी जहाज पार नहीं हो सकता। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य शक्ति को पहले ही व्यापक क्षति पहुंचाई जा चुकी है, जिसके तहत उसकी नौसेना, वायुसेना और मिसाइल क्षमताओं का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त किया जा चुका है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वक्तव्य में परमाणु निरस्त्रीकरण के मुद्दे को अपनी सरकार की विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने सचेत किया कि यदि ईरान परमाणु शक्ति बनता है, तो इससे पूरे मध्य पूर्व में एक भीषण परमाणु युद्ध भड़क सकता है, जिसकी तपिश अमेरिका और यूरोप तक पहुंचेगी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यद्यपि बातचीत के रास्ते खुले हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कदम उठाने का विकल्प भी पूरी तरह मेज पर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका हर हाल में यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके, अन्यथा वाशिंगटन को कोई बड़ा और सख्त कदम उठाना पड़ेगा। इस बीच, विदेश मंत्री रुबियो ने भी माना कि बातचीत चल रही है, लेकिन इसके अंतिम परिणाम की गारंटी नहीं दी जा सकती, क्योंकि राष्ट्रपति हमेशा समझौते और कूटनीति को ही पहला मौका देते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत के साथ रणनीतिक संबंधों और ऊर्जा सुरक्षा पर भी विशेष चर्चा की। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का जिक्र करते हुए रुबियो ने कहा कि अमेरिका, भारत की आवश्यक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आपूर्ति करने को तैयार है। भारत को एक ‘बेहतरीन सहयोगी और भरोसेमंद साझेदार’ बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश कई मोर्चों पर मिलकर ऐतिहासिक काम कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आगामी भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने और ‘क्वाड’ (Quad) समूह की बैठकों में रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने पर मुख्य फोकस रहेगा।