प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद, शुक्रवार को इसके मुख्य बिंदुओं की जानकारी साझा की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में ‘ईज ऑफ लिविंग’ (सहज जीवन) और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार में सुगमता) के मानकों को मजबूत करने के साथ-साथ देश में सुधार प्रक्रियाओं को तेज करने पर व्यापक रणनीति बनाई गई। प्रधानमंत्री ने इस विचार-विमर्श को अत्यंत परिणामोन्मुखी और सकारात्मक बताया है।
विदेशी दौरे से स्वदेश वापसी के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार शाम 5 बजे ‘सेवा तीर्थ’ में इस महत्वपूर्ण बैठक का नेतृत्व किया। साल 2026 में आयोजित होने वाली यह पहली पूर्ण मंत्रिपरिषद बैठक थी, जिसमें कैबिनेट मंत्रियों, राज्यमंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों सहित पूरी मंत्रिपरिषद ने हिस्सा लिया। इससे पहले इस तरह की पिछली पूर्ण बैठक का आयोजन पिछले वर्ष 4 जून 2025 को किया गया था।
बैठक के अगले दिन शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस चर्चा के मुख्य अंश साझा किए। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि कल आयोजित हुई मंत्रिपरिषद की बैठक काफी सफल रही। इस दौरान ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने से जुड़े नवीन विचारों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही, ‘विकसित भारत’ के साझा संकल्प को पूरा करने के लिए आगामी सुधारों की रूपरेखा पर भी मंथन हुआ।
यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण आर्थिक मोर्चे पर कई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की आपूर्ति बाधित होने की आशंका, बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जैसे मुद्दों ने चिंताएं बढ़ाई हैं। केंद्र सरकार इन वैश्विक हालातों और उनके घरेलू प्रभाव पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
इन उभरती आर्थिक चुनौतियों के बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही नागरिकों से ईंधन के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अपील की है। सरकार ने वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) को प्राथमिकता देने, ऑनलाइन बैठकों का दायरा बढ़ाने, कम से कम एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने और गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं को टालने जैसे सुझाव दिए हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य वैश्विक उथल-पुथल के बीच देश की आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखते हुए विकास की रफ्तार को बनाए रखना है।