वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आह्वान: भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर जताएं भरोसा, डर का माहौल न बनाएं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आह्वान: भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर जताएं भरोसा, डर का माहौल न बनाएं

वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का भरोसा दिलाया है। उन्होंने सिडबी (SIDBI) के स्थापना दिवस समारोह में स्पष्ट किया कि देश की आर्थिक बुनियाद बेहद ठोस है। वित्त मंत्री ने उन तत्वों की कड़ा आलोचना की जो देश में भय और संदेह का माहौल तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास को डिगाने वाले प्रयासों के स्थान पर सभी को नागरिकों में सकारात्मकता और भरोसा जगाने का काम करना चाहिए।

सिडबी के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो देश की आर्थिक प्रगति को लेकर नकारात्मक और संशयवादी दृष्टिकोण फैला रहे हैं। निर्मला सीतारमण के अनुसार, ऐसा दृष्टिकोण भारतीय नागरिकों की कड़ी मेहनत, उनकी उपलब्धियों और देश के विकास में उनके अमूल्य योगदान को कमतर आंकता है। उन्होंने आर्थिक विकास के प्रति सकारात्मक रुख अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

देश की आर्थिक स्थिति के अग्रिम संकेतकों (हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स) का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि घरेलू मांग में लगातार मजबूती देखी जा रही है। सितंबर 2025 में टैक्स दरों में की गई कटौती के बाद भी जीएसटी (GST) के संग्रह में शानदार बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। इसके साथ ही रिटेल, एग्रीकल्चर और एमएसएमई (MSME) सेक्टर में गाड़ियों की बिक्री और लोन मिलने की रफ्तार दोनों ही काफी बेहतर स्थिति में हैं।

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सांख्यिकीय आंकड़ों को साझा करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सितंबर 2025 के दौरान निजी क्षेत्र के खर्चों में सालाना आधार पर 67 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है। इसके अतिरिक्त, मार्च तिमाही के दौरान भारतीय कंपनियों का मुनाफा भी अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो निजी निवेश में आ रही तेजी को प्रमाणित करता है।

वैश्विक परिस्थितियों पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष का प्रभाव भारत पर भी दिख सकता है। इस संकट के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ने, जहाजों के भाड़े में वृद्धि होने और निर्यात की राह में रुकावटें आने का खतरा है। उन्होंने कहा कि इस तनाव से कंपनियों के वर्किंग कैपिटल चक्र पर असर पड़ सकता है और एक्सपोर्ट ऑर्डर्स को लेकर अनिश्चितता आ सकती है। इसके बावजूद, भारत की मैक्रो-इकोनॉमिक बुनियाद इस झटके को सहने के लिए पूरी तरह सक्षम और मजबूत है।

छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए की गई सरकारी पहलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने कई घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि ऋण व्यवस्था को आसान बनाने के लिए सिडबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के बीच एक को-लेंडिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। साथ ही, सीजीटीएमएसई योजना के अंतर्गत एक विशेष माइक्रो क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया गया है, जिसकी मदद से उद्यम पोर्टल पर रजिस्टर्ड एमएसएमई को बिना किसी गारंटी के 5 लाख रुपए तक का कर्ज मिल सकेगा। इसके अलावा केंद्रीय कैबिनेट ने ईसीएलजीएस 5.0 को भी हरी झंडी दे दी है, जिसके माध्यम से छोटे उद्योगों के लिए 2.55 लाख करोड़ रुपए तक के लोन की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।

अंत में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से देशवासियों और व्यापारियों को बचाने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती की है। इस जनकल्याणकारी कदम के चलते सरकार को वित्त वर्ष 2027 में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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