मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को गंगा दशहरा के पावन अवसर पर धार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में घोषणा की कि ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में मध्य प्रदेश सरकार एक भव्य ‘सरस्वती लोक’ का निर्माण कराएगी। इसके साथ ही धार में राजा भोज शोध संस्थान और राजधानी भोपाल में राजा भोज संग्रहालय की स्थापना भी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दिए गए न्यायिक आदेश का राज्य सरकार पूरी तरह से और अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राजा भोजपाल द्वारा स्थापित यह भोजशाला सदियों तक ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और संस्कृत भाषा का सबसे प्रखर केंद्र रही है। इसे प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का एक अटूट प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि सुदूर क्षेत्रों से छात्र और विद्वान यहाँ ज्ञान प्राप्त करने तथा शास्त्रों पर वैचारिक चर्चा के लिए आते थे। राज्य सरकार भोजशाला के उसी गौरवशाली अतीत को पुनः बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि राजा भोज की इस पावन भूमि पर चौमुखी विकास की एक नई धारा प्रवाहित होगी और पुरातत्व विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर धार के आस-पास सभी प्रकार के विकास कार्य संपन्न किए जाएंगे।
जल संरक्षण के क्षेत्र में राजा भोज के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें जल प्रबंधन का अग्रदूत बताया। उन्होंने कहा कि राजा भोज द्वारा निर्मित विशाल जलाशय, तालाब और तत्कालीन जल प्रबंधन प्रणालियां आज भी उनकी अद्भुत दूरदर्शिता और जल नियोजन का जीवंत प्रमाण हैं। किसी समय तालाबों की नगरी के रूप में विख्यात रहे धार शहर में जलापूर्ति के लिए राजा भोज ने साढ़े बारह तालाबों का निर्माण करवाया था। इन तालाबों को आपस में इस प्रकार संबद्ध किया गया था कि एक तालाब के भरने पर उसका अतिरिक्त पानी स्वतः ही दूसरे तालाब में चला जाता था।
वर्तमान में प्रदेश में जारी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का जिक्र करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि इस अभियान से राज्य में जल संवर्धन की एक नई क्रांति का सूत्रपात होगा। इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के मामले में खंडवा, बड़वानी, अशोकनगर, राजगढ़ और डिंडौरी के पश्चात धार जिला पूरे प्रदेश में छठवें स्थान पर है। वर्तमान में धार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के 5 हजार से अधिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि धार नगरपालिका क्षेत्र की 64 प्राचीन बावड़ियों और तालाबों का संरक्षण व जीर्णोद्धार कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री सोमवार को इसी राज्य स्तरीय ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहाँ उन्होंने भोजशाला में माँ वाग्देवी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी की और प्रदेश की समृद्धि की कामना की।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय से 750 वर्षों का संघर्ष सफल हुआ है और धार में एक नए युग का उदय हुआ है। उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए न्यायालय का आभार जताया और राज्य की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि धार अब प्रदेश के अग्रणी औद्योगिक जिलों में शुमार हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश भर में जल संरक्षण की दिशा में व्यापक कार्य हो रहे हैं, जिसमें मध्य प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य में जनभागीदारी से जल संरक्षण के 2 लाख 42 हजार 188 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत 2500 करोड़ रुपये की लागत के कार्य वर्तमान में जारी हैं। अब तक प्रदेश में 89 हजार 772 कुओं को रिचार्ज किया गया है, 55 हजार से अधिक खेत तालाब और 105 अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा चुका है, साथ ही लाखों नागरिकों को ‘जलदूत’ के रूप में तैयार किया गया है। नगरीय निकायों ने 2 हजार 224 कार्यों के लक्ष्य के मुकाबले 9 हजार 630 कार्य पूर्ण कर लिए हैं, जो कि मूल लक्ष्य का 433 गुना अधिक है।
राजा भोज के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके द्वारा संरक्षित स्थान और भोजपत्र हमारी अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने भोपाल के निकट भोजपुर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना कराई थी। भोपाल के बड़े तालाब की निर्माण तकनीक आज भी दुनिया के विद्वानों को विस्मृत करती है। इसके अतिरिक्त, राजा भोज ने एक 45 फीट लंबा ऐसा लौह स्तंभ निर्मित करवाया था जिस पर कभी जंग नहीं लगती, जिसके विषय में अरब के इतिहासकार अलबलूनी ने लिखा था कि उन्होंने विश्व में ऐसा स्तंभ कहीं नहीं देखा। राजा भोज कवियों का आदर करते थे और उनके सम्मेलन आयोजित कराकर प्रत्येक रचना के लिए उन्हें सोने की ईंट से पुरस्कृत करते थे। उनकी वीरता, धैर्य, पराक्रम और गंभीरता के समकक्ष कोई अन्य राजा दिखाई नहीं देता और दक्षिण में तमिलनाडु के पास भी एक भोज मंदिर अवस्थित है।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने धार जिले के निवासियों को 88.04 करोड़ रुपये की लागत वाले 12 विकास कार्यों के भूमिपूजन की सौगात दी, जिसमें चंबल नदी पर लेबड़-घाटाविल्लौद मार्ग पर 27.21 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला फोरलेन उच्च स्तरीय पुल भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने भोजशाला आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले तीन शहीदों—दिवंगत श्री बनसिंह, दिवंगत श्री अंतरसिंह और दिवंगत श्री लक्ष्मण सिंह के निकटतम आश्रितों को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम में तीनों शहीदों के सम्मान में मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को मंच से लाभ भी वितरित किए।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने भोपाल के एक बहुचर्चित मामले की जांच त्वरित निर्णय लेते हुए सीबीआई को सौंपने के राज्य सरकार के कदम का उल्लेख किया, जिसकी आज सुप्रीम कोर्ट ने भी सराहना की है। उन्होंने कहा कि न्यायालय जब भी कोई निर्णय देता है, सरकार उसे अक्षरशः लागू करती है और विकास के मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। इस गरिमामयी कार्यक्रम को नगरीय विकास एवं आवास तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, क्षेत्रीय विधायिका श्रीमती नीनाविक्रम वर्मा, विधायक श्री कालू सिंह ठाकुर सहित कई जनप्रतिनिधि और विशाल जनसमूह उपस्थित था।