मध्यप्रदेश ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद के मामले में देश भर में पहला स्थान हासिल किया है। मौजूदा सीजन में राज्य सरकार अब तक प्रदेश के 13 लाख 27 हजार किसानों से लगभग 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदारी कर चुकी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार, यदि कोरोना काल के समय को छोड़ दिया जाए, तो पिछले एक दशक (10 वर्ष) में इस साल समर्थन मूल्य पर गेहूं की यह सबसे बड़ी सरकारी खरीद दर्ज की गई है। राज्य में गेहूं उपार्जन की यह प्रक्रिया फिलहाल जारी है।
इस रिकॉर्ड पैदावार और खरीद के पीछे प्रशासनिक स्तर पर किए गए बदलाव और निरंतर समीक्षा अहम रहे हैं। विभागीय मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष प्रयासों के चलते केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए निर्धारित 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के शुरुआती लक्ष्य को बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया था। मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी कर रहे हैं। व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए उन्होंने कई उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण भी किया, जहां उन्होंने बारदाने की उपलब्धता, तौल व्यवस्था और किसानों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधे बातचीत कर फसल के भुगतान की स्थिति की जानकारी भी ली। किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्लॉट बुक करा चुके किसानों के लिए गेहूं बेचने की अंतिम समयसीमा को 23 मई से बढ़ाकर 28 मई कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फसल बेचने वाले किसानों को अब तक 22,165.21 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। किसानों की सुविधा और कतारों को कम करने के लिए प्रत्येक केंद्र पर तौल कांटों की संख्या को 4 से बढ़ाकर 6 कर दिया गया है, और जिला प्रशासन को आवश्यकतानुसार इनमें और बढ़ोतरी करने के अधिकार सौंपे गए हैं। इसके अलावा, तौल पर्ची काटने की समयसीमा को शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक और बिल (देयक) जारी करने का समय रात 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। वर्तमान में गेहूं की यह खरीदी सप्ताह में 6 दिन की जा रही है। मंडियों और केंद्रों पर किसानों के लिए छांव, पीने के पानी और अन्य आवश्यक जन-सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
किसानों को उनकी उपज की सही कीमत देने के लिए केंद्र के निर्धारित समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल के साथ राज्य सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस जोड़ा गया है। इस तरह किसानों से 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। खरीदे गए इस अनाज को सुरक्षित रखने के लिए भंडारण की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। केंद्रों पर समय से तौल प्रक्रिया पूरी करने के लिए बारदाने, हम्माल, तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, गुणवत्ता जांचने के उपकरण और अनाज की सफाई के लिए पंखे व छन्ने जैसी आवश्यक सामग्री पहले से ही चाक-चौबंद की गई है।