सीमा सुरक्षा के लिए ‘चतुष्कोणीय ग्रिड’ आवश्यक, ड्रोन और तस्करी पर सरकार अपनाएगी सख्त रुख: गृह मंत्री

सीमा सुरक्षा के लिए ‘चतुष्कोणीय ग्रिड’ आवश्यक, ड्रोन और तस्करी पर सरकार अपनाएगी सख्त रुख: गृह मंत्री

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सांचू पोस्ट पर मंगलवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक भव्य ‘प्रहरी सम्मेलन’ संपन्न हुआ। इस अवसर पर गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) की महिला प्रहरियों के लिए विशेष रूप से निर्मित नई बैरकों का डिजिटल उद्घाटन भी किया। राजस्थान के बीकानेर जिले में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ-साथ देश के शीर्ष सुरक्षा नीति निर्धारक, जिनमें केंद्रीय गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक, सीमा प्रबंधन सचिव और BSF के महानिदेशक शामिल थे, उपस्थित रहे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल के गौरवशाली इतिहास और उनके सर्वोच्च बलिदानों को नमन किया। उन्होंने कहा कि बल के जवानों ने अपनी स्थापना के समय से ही देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है। चाहे झुलसा देने वाली भीषण गर्मी हो, जमा देने वाली ठंड हो, या फिर घने जंगल और बर्फ से ढकी चोटियां हों, प्रहरियों ने हमेशा मुस्तैदी से सीमाओं की रक्षा की है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि बल के दो हजार से अधिक वीर जवानों का सर्वोच्च बलिदान इस पूरे राष्ट्र पर एक ऐसा कर्ज है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता, और संपूर्ण भारत को अपने इन जवानों की वीरता पर गर्व है।

महिला सुरक्षाकर्मियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में महिलाओं की सहभागिता को बढ़ावा देना और उन्हें उत्तम बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस दिशा में एक दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक सीमा पर तैनात सभी महिला जवानों के लिए हर जरूरी और आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित कर दी जाएंगी। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास का विवरण देते हुए बताया कि राजस्थान में स्वीकृत की गई 79 बैरकों में से करीब 39 करोड़ रुपए की लागत से 67 बैरकों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जिनमें से 14 बैरकों को मंगलवार को राष्ट्र को समर्पित किया गया। उन्होंने आगे जोड़ा कि BSF की विभिन्न सीमाओं पर बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कुल 200 करोड़ रुपए की लागत से 356 नए बैरकों का निर्माण किया जा रहा है।

सुरक्षा की नई अवधारणा को स्पष्ट करते हुए अमित शाह ने कहा कि सीमा की रक्षा केवल एक अलग-थलग ड्यूटी (isolated duty) नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण क्षेत्रीय जिम्मेदारी (territorial responsibility) है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वास्तविक और प्रभावी सीमा सुरक्षा तभी संभव है जब BSF, भारतीय सेना, सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिक और वहां का स्थानीय प्रशासन मिलकर एक अटूट ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’ के रूप में कार्य करें। उन्होंने कहा कि देश की सीमा में शून्य घुसपैठ की स्थिति को कायम रखना हम सभी का साझा उत्तरदायित्व है और इस लक्ष्य को हम इसी मजबूत सुरक्षा ग्रिड के माध्यम से ही हासिल कर सकते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भों और पूर्व के सैन्य अभियानों की चर्चा करते हुए गृह मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सीमा सुरक्षा बल के असाधारण शौर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और जिस भी अग्रिम मोर्चे पर BSF की तैनाती रही, वहां हमारे जवानों ने पूरी दृढ़ता के साथ दुश्मन का सामना किया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बल ने केवल सीमा की ही रक्षा नहीं की, बल्कि सीमावर्ती जिलों के निवासियों के मनोबल को भी हमेशा ऊंचा बनाए रखा। पड़ोसी देश को कड़ा संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी विपरीत परिस्थितियां आईं, हमारे सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की हर हिमाकत का बेहद करारा और मुंहतोड़ जवाब दिया।

सांचू पोस्ट के गौरवशाली अतीत का स्मरण कराते हुए अमित शाह ने वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की वीरगाथा साझा की। उन्होंने बताया कि उस ऐतिहासिक संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की सेना ने सांचू पोस्ट पर आधिपत्य जमाने का प्रयास किया था, लेकिन आरएसी (RAC) और 13 ग्रेनेडियर के जांबाज सैनिकों ने अपनी असाधारण जवाबी कार्रवाई से दुश्मन के मंसूबों को ध्वस्त कर सांचू को सुरक्षित रखा था। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इसी ऐतिहासिक विजय की याद में आज के दिन को “सांचू दिवस” के रूप में पूरे सम्मान के साथ मनाया जाता है, जो भारतीय सैन्य इतिहास के पन्नों में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में ढांचागत विकास को गति देने की सरकारी योजनाओं को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मरुस्थलीय इलाकों में परिवहन और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा रहा है। इसके लिए राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में लगभग 1096 किलोमीटर लंबी लेटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्सियल रोड का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे अग्रिम चौकियों के बीच संपर्क बेहद मजबूत हो जाएगा। इसके अलावा, घुसपैठ रोकने के लिए नई तकनीक से लैस हाईटेक फेंसिंग का कार्य भी निरंतर जारी है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण नागरिक सुविधा का उल्लेख करते हुए बताया कि राजस्थान की लगभग 180 अग्रिम चौकियों तक पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

बदलते दौर की सुरक्षा चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि वर्तमान में देशविरोधी तत्व सुरक्षा व्यवस्था को भेदने के लिए आधुनिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे नई चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। इसी रणनीतिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने BSF के अधिकार क्षेत्र को सीमा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर अब 50 किलोमीटर तक विस्तारित कर दिया है। उन्होंने बल के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए कि वे इस 50 किलोमीटर के दायरे में होने वाले किसी भी अनधिकृत निर्माण और संदेहास्पद जनसांख्यिकीय बदलावों पर निरंतर पैनी नजर रखें तथा ऐसी गतिविधियों की रिपोर्ट तुरंत स्थानीय प्रशासन को सौंपें। ड्रोन के बढ़ते खतरों पर उन्होंने कहा कि ड्रोन और अन्य आधुनिक माध्यमों से सीमा पार से होने वाली हथियारों तथा नशीले पदार्थों की तस्करी को हर हाल में रोकना होगा। इसके समाधान के रूप में उन्होंने घोषणा की कि आगामी छह महीनों के भीतर सीमा पर अत्यधिक आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किए जाएंगे और जवानों को विश्वस्तरीय सुरक्षा उपकरण प्रदान किए जाएंगे।

सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक उत्थान की चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी योजना ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत सीमांत गांवों का चहुंमुखी विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने BSF को इस महत्वपूर्ण विकास योजना में आगे बढ़कर अग्रणी भूमिका निभाने का निर्देश दिया, ताकि केंद्र और राज्य सरकारों की सभी जनहितैषी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ इन सुदूरवर्ती सीमांत गांवों के प्रत्येक नागरिक तक अनिवार्य रूप से पहुंच सके।

अपने संबोधन के समापन पर गृह मंत्री ने देश की आंतरिक सुरक्षा के प्रति भी सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पार के खतरों से निपटने के साथ-साथ हमें देश के भीतर छिपे उन तत्वों पर भी कड़ी नजर रखनी होगी जो आंतरिक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं। ऐसे राष्ट्रविरोधी तत्वों के विरुद्ध कानून के अनुसार अत्यंत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश के पर्यावरण संरक्षण में केंद्रीय सशस्त्र बलों के अनुकरणीय योगदान की सराहना की। उन्होंने गर्व के साथ आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों की अवधि में इन बलों के जवानों द्वारा देश भर में लगभग 7 करोड़ 35 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए गृह मंत्री ने स्वयं कार्यक्रम स्थल पर मरुस्थल के ‘कल्पवृक्ष’ के रूप में पूजनीय खेजड़ी का एक पौधा रोपित किया।

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